सेना प्रमुख बिपिन रावत ने क्यों दिया श्री लंका और म्यांमार को भारत का 400 करोड़ का झटका

वैसे आज की खबर सुनने के बाद आपको भी चीज का एहसास हो जाएगा कि किस तरह आजादी के बाद से आज तक भारत के स्वदेशी डिफेंस सेक्टर को लगातार इग्नोर किया जाता रहा और यह कोशिश बिल्कुल नहीं की गई कि हमारा स्वदेशी डिफेंस सेक्टर बी कभी अपने पैरों पर खड़ा हो सके। अब इसके पीछे का क्या कारण है। वह बता पाना तो बहुत ही मुश्किल है क्योंकि इससे पहले आज तक नहीं सभी सरकारें भारत में डिफेंस सेक्टर की प्राइवेटाइजेशन उरी सेक्टर में प्राइवेट प्लेस को घुसने नहीं दे रही थी।

 

 

लेकिन अचंभे की बात यह है कि भारतीय सरकार विदेशों की प्राइवेट कंपनियों से धड़ाधड़ हथियार खरीद रही थी। फाइटर जेट्स समरी टैंक वगैरा ले चलो। मान भी लेते हैं कि हमारे पास इनको मेनी फैक्चर करने की काबिलियत नहीं है और ना ही कोई प्राइवेट डिफेंस सेक्टर की कंपनी इन में इंटरेस्टेड थी, लेकिन ग्लोब्स ,स्लीपिंग बैग्स, मिलिट्री बूट्स विनमेक्स जितनी मामूली सी चीजें भी विदेशों की कंपनी से मंगवाई जा रही थी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सैनिकों के लिए ग्लोब्स खरीदा जा रहे थे म्यांमार से | जी हां बिल्कुल ठीक टिक सुना अपने पड़ोसी देश म्यानमार आज के समय पॉलिटिकल प्रासिस चल रहा है। वही सियाचिन में इस्तेमाल होने वाले स्लीपिंग बेड आते थे श्रीलंका से | और आपको हैरानी होगी यह जानकारी कानपुर उत्तर प्रदेश की कंपनी मिलिट्री बूट सप्लाई कर रही है इजरायली आर्मी के लिए मगर इंडियन आर्मी के लिए स्पेशलिस्ट मिलिट्री बूट आ रहे थे इटली से यानी हम आज पर पहले टाइम में पहुंच सकते हैं।

 

 

टैंक से लेकर टोपे अग्नि मिसाइल तेजस फाइटर जेट जैसे की एयर हथियार भारत में खुद मेनी फेक्चर कर सकते हैं। लेकिन स्लीपिंग बैग ग्लोब्ज़ और मिलिट्री बूट के लिए हमें म्यानमार और श्रीलंका जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ेगा। वही आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मिलिट्री का क्लोथिंग बजट 200 से 400 करोड़ के आसपास तक का है जो कि म्यांमार श्रीलंका जैसे देश खा जाते थे, लेकिन अब इस पर लगाम लगाने के लिए भर्ती सरकार और सेना नियम मन बना लिया है।

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री ऑफिस के सेक्रेट्री टो चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मोलिटरी क्रोधी के इंडिजिनाइजेशन पर जोर देने का फैसला किया है। मतलब कि अब से सियाचिन ग्लेशियर पर तैनात भारतीय सैनिकों की मिलिट्री क्लोथिंग के लिए स्वदेशीकरण का रास्ता चुनते हुए भारत की स्वदेशी कंपनियों की तलाश की जाएगी।

इसी के साथ क्योंकि दिखाएं डिफेंस सेक्टर में अब भारतीय सरकार ने 100% एफडीआई यानी हंड्रेड परसेंट फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट अल्लोव कर दी है। इसीलिए विदेशों से जिन कंपनियों से मिलिट्री क्लोथिंग खरीदे जा रहे थे, उनको भारत की फैक्ट्री और वर्कशॉप स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा ताकि जब वह भारत में को मैन्युफैक्चर करें तो भारत की बाकी लोकल टेक्सटाइल को लेदर इंडस्ट्री जो इनको रौ मटेरियल प्रोवाइड करें कि उनको भी से फायदा हो।

 

 

जनरल बिपिन रावत को लेकर कितने सीरियस हैं, उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि बिपिन रावत बेंगलुरु बेस्ट क्लॉथ इन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के पास इससे संबंधित विषय पर भारतीय सेना की तरफ से डिमांड रख ने खुद ही विषय पर गए थे और उन्होंने उस बेंगलुरु इस कंपनी को इंडियन आर्मी की रिक्वायरमेंट बताते हुए इंक्वायरी किया कि क्या वह कंपनी भारतीय सेना के लिए स्लीपिंग बैग्स?

ग्लोब्स और बूट की सप्लाई सप्लाई कर पाएगी या फिर नहीं वैसे हैरानी इस बात की है कि इतने बेसिक इक्विपमेंट भी अभी तक विदेशों से मंगवाई जा रहे थे। अगर देखा जाए तो भारतीय सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस ने अभी तक कुल 209 आइटम की लिस्ट जारी कर दी है। जिनको आत्म निर्भर अभियान के तहत भारत में बनाया जाएगा और उनके इंपोर्ट पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। इस लिस्ट में मिसाइल से लेकर आर्टिलरी गन और कई तरह के हाईटेक हत्या शामिल है।

बेहतर होगा कि भारतीय सरकार को यह बेसिक चीजें जैसे कि टेंट हाउस, स्लीपिंग बैग वगैरह यह सभी उस लिस्ट में ऐड कर देना चाहिए। वैसे आपको क्या लगता है कि क्या मोदी सरकार ने सरकार में संतुष्टि बड़ा काम किया है या फिर नहीं नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।

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