संजय दत्त के लिए सुनील दत्त को बालासाहेब ठाकरे के पास ले गए राजेंद्र कुमार!

सुनील दत्त और राजेन्द्र कुमार एक दुसरे के समधी है ! राजेन्द्र कुमार के बेटे कुमार गौरव ने सुनील दत्त की बेटी नम्रता से शादी की है समधी होने के साथ साथ सुनील दत्त और राजेन्द्र कुमार एक दुसरे के अच्छे दोस्त भी है ! यह किस्सा उस वक्त का है जब सुनील दत्त संजय दत्त की मुंबई बम धमाके और टाडा की तहद गिरफ्तारी से बड़े मुश्किल में थे !

संजय को बचाने के लिए वे दर दर की खाक छान रहे थे कोंग्रेस के दिग्गज नेता होने के बाबजूद दिल्ली में कोई कोंग्रेसी नेता उनकी नही सुन रहा था थक हार कर मुंबई लौटे सुनील दत्त जब संजय को बचाने की पूरी आस खो चुके थे तब राजेन्द्र कुमार ने उन्हें सलाह दी की वे शिव सेना सुप्रीमो बाला साहब ठाकरे से मिले वे ही उनकी मदद कर सकते है यह बात सुनील दत्त को कतई पसंद नही आई !

उन्होंने लगभग चिल्लाते हुए राजेन्द्र कुमार की सलाह को ठुकरा दिया लेकिन राजेन्द्र कुमार ने सुनील दत्त को कहा की थोड़ा ठंडे दिमाग से सोच लो फिर बात करेंगे ! राजेन्द्र कुमार ने सुनील दत्त को याद दिलाया की किस तरह बाला साहब ने अमिताभ बच्चन को शहंशाह फिल्म के लिए मदद की थी उस वक्त अमिताभ वोफोर्स काण्ड में फसे थे और फिल्म पर वेंन लगाने की बात चल रही थी

दो चार दिन बाद सुनील दत्त ने राजेन्द्र कुमार को फोन कर कहा की वे तैयार है लेकिन बाला साहब से बात कैसे करेंगे इस पर राजेन्द्र कुमार ने कहा की तुम्हें कुछ करने की जरूरत नही है मैं खुद तुम्हें ले जाऊँगा तुम बस अपना आपा मत खोना कुछ दिनों के बाद राजेन्द्र कुमार सुनील दत्त और संजय दत्त बाला साहब ठाकरे से मिलने उनके निवास स्थान मातोश्री गए वहां सुनील को देखते ही बाला साहब बोले मैं जानता हूँ

तुम्हें , तुम मुझे पसंद नही करते लेकिन एक जमाने में तुम्हारा बहुत बड़ा फैन रहा हूँ ! बाला साहब के यह शब्द सुनकर सुनील दत्त के दिल का बोझ उतर गया और वे बाला साहब के सामने रो पड़े ! बाला साहब ने सुनील दत्त से पूछा बताओ में तुम्हारे लिए क्या कर सकता हूँ

सुनील बोले किसी भी तरह से संजय को बचा लीजिये बाला साहब बोले मैं तो कहीं सत्ता में नही हूँ फिर मैं यह कैसे कर सकता हूँ कुछ देर की बातचीत के बाद बाला साहब ने सुनील से कहा देखते है क्या हो सकता है लेकिन यह में सिर्फ तुम्हारे लिए कर रहा हूँ संजय के लिए नही ! फिर बाला साहब ने संजय को कमरे में बुलाया

संजय दत्त को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए कहा की आगे से जो तुम्हारे पिता बोले वैसा ही करना किसी और के वह्काबे में मत आना संजय दत्त ने बाला साहब की बातों में हामी भरी ! फिर बाला साहब ने तीनों को भगवा तिलक लगाकर विदा कर दिया जाने से पहले सुनील से बाला साहब से पूछा की क्या वे बदले में उनके लिए कुछ कर सकते है सुनील दत्त ने यह कह दिया की वे राजनीति से सन्यास तक ले सकते है

लेकिन बाला साहब ने कहा इसकी कोई जरूरत नही वो अपना राजनितिक जीवन जारी रखे लेकिन अब सुनील दत्त का दिल कोंग्रेसी नेताओं से खट्टा हो चूका था और वे अगले चुनाव में नही खड़े हुए !

 

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