PM मोदी ने दी दलाई लामा को बधाई, क्या दलाई लामा से करीबियों के भारत के हित में पढ़िए ये रिपोर्ट

नमस्कार दोस्तों मोदी जी जबसे प्राइम मिनिस्टर बने हैं इन्होंने आज तक फोन पर दलाई लामा से बात नहीं करी। इंडियन गवर्नमेंट ऑल टुगेदर आप अगर देखो तो 2015 से काफी दूरी बना ली थी फ्रॉम दलाई लामा यह सब किया गया था चाइना को खुश करने के लिए मगर अब जाकर पहली बार जब से पीएम मोदी प्राइम मिनिस्टर बने हैं ।

इन्होंने फोन पर बात करि है दलाई लामा को बर्थडे विश किया है। वैसे आप अगर देखो तो उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि मैंने फोन पर बात करी वह दलाई लामा और उनको विश किया हैों ऑन 86 बर्थडे ट्विटर पर उन्होंने बर्थडे विश किया था। 2015 में मगर जब से पीएम बनी है, नकली बातचीत नहीं हुई ना पीएम मोदी का यह स्टेप बहुत इंपॉर्टेंट है। एस्पेशली एक ऐसे टाइम में जब इंडिया चाइना दोनों कंट्रीज ने बॉर्डर पर दो दो लाख सोल्जर्स डिप्लॉय कर दिए हैं और बाय द वे यहां पर आप देखोगे यह फोटो है दलाई लामा की |

 

 

और चाइना एंड द पास्ट ओपनली इंडिया पर आरोप लगा चुका है कि भारत दलाई लामा का इस्तेमाल करता है चाइना के अगेंस्ट | चाइना का मैं डर यहां पर दलाई लामा से यह है कि तिब्बत की आजादी का सबसे बड़ा चेहरा का दुनिया में कोई है तो वह है हिस होलीनेस दलाई लामा अब सबको पता होगा। यहां पर यह है तबियत इस देश को चाइना ने 1950 में कबजाना स्टार्ट कर दिया था और एकबार जब इनका कब्ज़ा कंप्लीट हो गया 1959 तक जब यहाँ पर रूरल थे दलाई लामा भाग कर आ गए इंडिया में |

और इंडिया में आकर काफी बार दलाई लामा ने तिब्बत की आजादी की बात करी है। चाइना यहां पर यह कहता है कि इंडिया ने आज के समय उस व्यक्ति को शरण दी है जो तिब्बत की आजादी की बात करता है आजादी की या फिर सेल्फ डिटरमिनेशन की बात करता है तो जब भी भारत ने दलाई लामा की कोई कॉन्फ्रेंस होती है दलाई लामा कही पर ट्रैवल करते हैं या फिर इन द पास्ट हमारे पीएम दलाई लामा से मिलते थे तब चाइना ओफ्फिशली प्रोटेस्ट करता था और कहता था अगर इंडिया को अच्छे रिलेशन बनाकर रखने अभी चाइना से तो इनको दलाई लामा से डिस्टेंस बनाकर रखना होगा।

 

 

नरेंद्र मोदी जी की मैं अगर बात करो तो प्राइम मिनिस्टर बनने से पहले यह बहुत बड़े सपोर्टर थे दलाई लामा के जब यह गुजरात के चीफ मिनिस्टर थे, मुझे याद है। इन्होंने कई बार धर्मशाला को विजिट किया वहां पर स्पीच दिए काफी बार देखा गया के यहां पर इनको कोई गिफ्ट प्रेजेंट करते थे। दलाई मगर जब से नरेंद्र मोदी की पीएम बने तब से लेकर अब तक आप देखोगे। एक भी फोटो आपको नहीं मिलेगी।

नरेंद्र मोदी जी और दलाई लामा की इंटरेस्टिंग बात यह भी है कि 2015 से तो उन्होंने बर्थडे भी ओपन विश करना बंद कर दिया था। 2015 में ऐसा क्या हुआ था ? 2015 में बहुत चीजें हुई थी पहली बात तो पीएम मोदी की हिस्टोरी विजिट थी चाइना में यह विजिट उस वक्त इंडिया चाइना में इतने कोई इश्यूज थे नहीं रिलेशंस काफी हद तक अच्छे भी थे छत तक आप कह सकते हैं और जब चाइना में कोई भी बातचीत करी गई के 22 बिलियन डॉलर की जो डील है, यह साइन करी गई है।

बिटवीन इंडिया एंड चाइना a7r इन्वेस्टमेंट पर बात की थी और कुछ हद तक यह डील मटेरियल आई हुई है। ग्राउंड पर कुछ इसका काम भी हुआ है। मगर चाइना ने बहुत ही इनफॉर्मल सीक्रेटिव तरीके से इंडियन गवर्नमेंट को यह बात बताई कि दलाई लामा को लेकर चाइना खुश नहीं है। यह बात बाद में इंडिया में बहुत से न्यूज़ ने कवर करी थी कि चाइना ने यह बात भारत सरकार को करने उतरी है और यह काफी बार पहले भी कर ले कर चुके हैं तो 2015 में इंडिया के पास यहां पर एक ऑप्शन थी

कि क्या हम यहां पर चाइना को अपिस करने की कोशिश करें। चाइना को खुश करने की कोशिश करें या फिर नहीं हम दलाई लामा के साथ मिलेंगे और उनके साथ सेमिनार भी हुआ करेंगे। इंडिया ने यहां पर पांच चूस किया। अपिजमेंट का इसके बारे में अपने काफी आर्टिकल पढ़े होंगे कि ऑलमोस्ट इंडिया ने यही कोशिश करी क्या चाइना को खुश रखो। नॉर्थ ईस्टर्न में बहुत बड़ा देश है इनके साथ में जाते नहीं इनके साथ हम चाहते नहीं की रिलेशंस खराब हो तो डिसाइड किया कर ठीक है।

 

 

जिस बात को लेकर यह बहुत ज्यादा इनसिक्योर है, वो इशू कम उठाएंगे तो उसके बाद से आप आकर देखो तो दलाई लामा ने जब यह भी कोशिश करि की एक कॉन्फ्रेंस ओं भारत में जहां पर हांगकांग के कुछ लोग आएंगे। कुछ भी गौर मुसलमान आएंगे और वह मिलकर यहां पर आलोचना करेंगे चाइना की सरकार की | इंडिया ने जो यह कॉन्फ्रेंस है। पहले तो अल्लोव करी मगर बाद में हांगकांग के लोग और जो एक और मुस्लिम के लीडर यहां पर आने वाले थे, उनका वीजा कैंसल कर दिया। इसको माना जाता है 2016 का इंडिया का चाइना ब्लंडर। यहां पर आप देखोगे। कि चाइना काफी हद तक अप्रिशिएट करेगा। इंडिया को यह मानेगा।

क्या भारत सरकार चाइना की इनसिक्योरिटी का भी ध्यान रख रही है ना उसके बाद आता है। 2017 यहां पर इंडिया को एक्चुअली रियलिटी पहली बार देखी है। चाइना असल में है क्या इनका व्यू प्वाइंट क्या है भारत को लेकर व्यू प्वाइंट क्या है? भारत को लेकर क्या हुआ कि दलाई लामा देखो सेंस भारत में रहते हैं। हम उनको भारत से निकालेंगे तो नहीं। अब भारत में जब वह है तो भारत की किसी भी स्टेट में ट्रेवल कर सकते हैं तो दलाई लामा कुछ दिन के लिए अप्रैल 2016 में गए थे अरुणाचल प्रदेश में |

चाइना ने पहली बार बहुत ही बड़ा इसका प्रोटेस्ट किया और यह कहा कि अरुणाचल प्रदेश इन के हिसाब से एक डिस्प्यूटटीजर यहां पर दलाई लामा एक ऐसा व्यक्ति है जो देश को तोड़ना चाहता है। उसको आप बुला रहे हो, यह बहुत गलत है जबकि इंटरेस्टिंग बात यह है की इससे पहले 6 बार दलाई लामा जा चुके थे अरुणांचल प्रदेश | मगर 2017 में चाइना ने पहली बार बहुत ही बड़े स्केल किया इस विज़न को लेकर और इंटरेस्टिंग बात देखिए के जैसे ही दलाई लामा की विजिट खत्म हुई कुछ ही महीनों के अंदर अंदर दोगलाम स्टैंडर्ड स्टार्ट हो गया।

 

 

भूटान के पास चाइना की आर्मी गेदर हो गई इंडियन आर्मी गेदर हो गई और बताया जाता है कि यहां पर चाइना ने दो क्लास स्टैंड ऑफ में इंडिया को मैसेज सेंड किया था कि फिर से दलाई लामा अरुणांचल प्रदेश गए तो यही होगा। उसके बाद दलाई लामा ने अरुणाचल प्रदेश को विजिट किया नहीं है तो 2017 के दोकलाम स्टैंड के बाद भी भारत की जो ओवरऑल निति थी चाइना को लेकर यह बदली 2021 तक भी आप अगर देखो तो हमारे प्राइम मिनिस्टर ओपनली दलाई लामा का नाम लेने से भी कतराते थे। मगर अब जाकर फाइनली एक अंडरस्टैंडिंग डोवलोप यहां पर इंडिया में के दलाई लामा को अगर हम दूर रखते हैं तो और उससे हम एक्सपेक्ट करते हैं कि चाइना का बिहेवियर चेंज हो जाएगा तो इंडिया तो यह हमारी गलती है। चाइना मैंटली इंडिया को देखता है।

एक बहुत बड़ा। ट्रेड के हिसाब से ऑलमोस्ट इक्वल नंबर ऑफ पीपल थोड़ी बहुत यहां पर हो जाती है। यूरोप का सपोर्ट मिल जाता है तो वे इंटेंड टो 10 टू 15 ईयर्स यह देश बहुत तेजी से आगे बढ़ सकता है और चाइना का जो सपना है कि ऐसा को कंप्लीट लिए वह सपना पूरा नहीं हो पाएगा। चाइना तो इंडिया के अगेंस्ट ही रहने वाला है आने वाले कई सालों तक था। इसमें कुछ पॉकेट ऑफ पी सकते हैं क्या दो-तीन साल तक को बहुत ज्यादा पीसफुल रिलेशन रहे बॉर्डर पर कुछ हुआ नहीं। मगर जॉन की ग्रैंडस्टेरेगी है वहां पर इंडिया इन के लिए फ्रेंडली कंट्री बिल्कुल नहीं है तो मैं पर्सनली बहुत खुश हूं यह बात देख कर के इंडिया फाइनली दलाई लामा को लेकर जो अपनी पॉलिसी है, इसमें बदलाव ला रहा है। उम्मीद यहां पर यह है कि दलाई लामा फिर से इन द फ्यूचर अरुणाचल प्रदेश को विजिट करेंगे।

 

 

मैं तो कहता हूं कि दलाई लामा को लदाख में भी लेकर जाइए। यूएस को भी यहां पर इन्वॉल्व आइए। उनको भी बोलो कि दलाई लामा को प्रमोट करो और अगर चाइना का यहां पर कोई भी विरोध आता है तो जो चारों को और देश है जापान ऑस्ट्रेलिया यूएस इंडिया इन चारों कंट्रीज के जो रिस्पेक्टिव प्राइम मिनिस्टर या प्रेसिडेंट है, यह एक सुर में आके चाइना के अगेंस्ट जवाब दें। इस टाइप की निति डेवलप कर पाते हैं तो ही चाइना को यहां पर प्रॉपर रेस्पोंस मिलेगा।

दलाई लामा को फिर से पब्लिकली एक्नॉलेज करने के पीछे एक रीजन यह भी है कि आपको पता होगा। चाइना के जो सोल्जर जाता है जो आते हैं। आज के समय ईस्टर्न साइड से इंडिया चाइना बॉर्डर के आसपास जाला ड्यूटी करनी है जो ट्रेन है वह उनके लिए काफी मुश्किल इस पर मैं अलग बना चुका हूं तो चाइना आज के समय क्या कर रहा है कि तबीयत के जो लोग कल से वहां पर जो जॉब्लेस से लोग है से जिनको के पास नौकरी नहीं है, जिनकी जिनका कर थोड़ा ठीक है उनको चाइना बस कोई तो एक दो महीने की ट्रेनिंग देकर अपनी आर्मी में भर्ती कर रहा है। इनमें से कई युवकों को अंदर से खराब लगता होगा। उनको पता है कि चाइना ने इनका देश कब लाया था और आज के समय इनको इस्तेमाल कर रहा है।

 

 

एक दूसरे देश को धमकाने के लिए तो इंडियन गवर्नमेंट जहां पर दलाई लामा को ओपन इज़त देती है तो चाइना को भी काफी तकलीफ आएगी। तबीयत में अनियंत्रित इसको रिक्रूट करने में कई आप होते बेतिया से हो सकता है कि सर्विस करने से ही मना कर दिया। की हम उस अनियंत्रित इसको रिक्रूट करने में कई आप हुए ध्यान से हो सकता है कि सर्विस करने से ही मना कर दे। यह देखते हुए कि हम उस कंट्री के खिलाफ खड़े हो जाएंगे। जिस कंट्री ने हमारे दलाई लामा को शरण दी है तो देखिए देर आए दुरुस्त आए। बहुत ही लंबे समय के ब्लंडर्स के बाद गलतियों के बाद फाइनली में मानता हूं कि इंडिया अब एक सही राह पर चल रहा है और हमारी सरकार प्रॉपर्ली एक्नॉलेज कर रही है। दलाई लामा को एंड फाइनली द बेस्ट।

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