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भारत बनाने वाला है “दुनिया का पहला ” ग्रीन रेटेड बुलेट ट्रैन | बड़ा निवेश

तो दोस्तों पूरी दुनिया में पहली बार ऐसा होने जा रहा है कि किसी बुलेट ट्रेन को ग्रीन रेटिंग दी जाएगी एंड नवभारत में जो बुलेट ट्रेन बनाई जा रही है बिटवीन मुंबई टू अहमदाबाद तो पूरे वर्ल्ड की पहली ऐसी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट होगी, जिसमें वर्ल्ड फर्स्ट ग्रीन सिस्टम सिस्टम बनाया जाएगा और रिसेंटली अपडेट निकल कर आई है।

दरहसल कम्पर्टेशन इंडियन इंडस्ट्री द्वारा फॉर्म की गई आईजीबीसी यानी कि इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल अब यह कोलैबोरेट करेंगे हमारे एनएचएसआरसीएल के साथ अब यह कोलाबा के साथ वह जो भी मापदंड होते हैं कि ग्रीन बिल्डिंग सिस्टम को अचीव करने के लिए और हाई स्पीड रेल कॉरिडोर पहली बार तो यह सभी काम करेंगे।

वैसे अक्सर आपने देखा होगा कि यह जो ग्रीन रेटिंग है नॉर्मल बिल्डिंग पर जो रेलवे स्टेशन होते हैं, मेट्रो स्टेशन उन सभी को दिए जाते। लेकिन एक हाई स्पीड ट्रेन को ग्रीन सेटिंग देना पहली बार होने जा रहा है और काफी गर्व वाली बात भी है बिकॉज़ भारत बुलेट ट्रेन बनाई जाएगी तो वह वर्ल्ड की पहली बुलेट ट्रेन होगी जिसे ग्रीन रेटिंग दी जाएगी।

अब भारत में हीरो बुलेट ट्रैन कॉरिडोर बनाए जाएंगे कॉरिडोर के साथ जो भी स्टेशन पर आ जाएंगे तो इन्हें अब काफी र स्ट्रिक्टली एनर्जी एफिशिएंट टेक्नोलॉजी साथ में डिजाइन कंस्ट्रक्शन फेस के दौरान उन्हें एनवायरमेंट सस्टेनेबिलिटी को भी ANSURE करना है। एंड देने वाली वह इस तरह के क्राइटेरिया के लिए एलिजिबल होंगे।

वैसे ही काफी लोगों को पता नहीं होगा, लेकिन यहां पर एनएचएसआरसीएल की वेबसाइट पर भी मेंशन है कि अगर आप बुलेट ट्रेन से हाई स्पीड ट्रेन से ट्रैवल करते हो 600 किलोमीटर की ट्रिप के लिए लगभग 8.1 KG ऑफ कार्बन एमिशन होता है। वहीं पर अगर आप प्लेन से ट्रैवल करते हो तो यह तो 93 KG होता है।

वहीं अगर आप कार से ट्रैवल करते हो तो यह उससे जरा कम विचित 67.4 KG की थी। लेकिन अगर हाई स्पीड कम्पयेर करें तो यह बिल्कुल भी आसपास नहीं हाई स्पीड से काफी कम कार्बन एमिशन होता है जस्ट 8.1 KG ये जो स्टडी है कार्बन एमिशन की ये इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवेज द्वारा कंटक की गई थी।

आंचल खरे जो की मैनेजिंग डायरेक्टर है एनएचएसआरसीएल के तो उन्होने ने कहा कि अभी जो कल हुआ है बिटवीन सीआई एंड आईजीबीसी ऑर्गेनाइजेशन हेल्प करेगा काफी सारे फ्यूचरिस्टिक ग्रीन कंसेप्ट को अडॉप्ट करने के लिए ड्यूरिंग डिजाइन कंस्ट्रक्शन ऑपरेशन फेसेस में ताकि इस तरह के हाई स्पीड कॉरिडोर को और ज्यादा एनवायरमेंट फ्रेंडली बना दिया जाए और इस तरह के टारगेट अचीव करने के लिए यहां पर काफी सारे प्रयास भी किए जाएंगे। सबसे पहले तो तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग मेकैनिज्म बनाए जाएंगे |

जो भी सोलर पैनल से उन्हें ज्यादा से ज्यादा स्टेशन के एरिया में स्टेशन के परिसर में उनकी रूप इनस्टॉल किया जाएगा ताकि हम सोलर पावर के जरिए जो भी ऑपरेशन है उन सभी को कनेक्ट कर सके और सबसे इंपॉर्टेंट बाद जो भी सर्टिफाइड ग्रीन बिल्डिंग मैटेरियल्स प्रोडक्ट या एक्वुपमेन्ट से तो उन्हें ही हाई स्पीड रेल के कंस्ट्रक्शन में यूज किया जाएगा।

मुंबई अहमदाबाद, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बीच में जो भी स्टेशंस होंगे या फिर जो भी बिल्डिंग होंगे तो यह सभी एक परफेक्ट एग्जांपल होंगे ग्रीन बिल्डिंग के बिकॉज़ यह पूरी तरह से एक्टिव होंगे। इको फ्रेंडली फीचर जैसे कि नेचुरल लाइट प्रोविजन इन सभी बिल्डिंग में होगा।

देन वेंटिलेशन भी यहां पर ज्यादा से ज्यादा नेचुरल तरीके से करने की प्रयास किया जाएगा। वेंटिलेशन भी यहां पर जितना ज्यादा पॉसिबल हो सके उतना किया जाएगा ताकि एनर्जी कंजर्वेशन कम हो सके और फाइनली इन सभी प्रैक्टिसेज के साथ जब यह पूरा कॉरिडोर बनकर तैयार हो जाएगा।

देन पूरे वर्ल्ड में पूरी दुनिया में यह वर्ल्ड कप पहला ऐसा बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट होगा, जिसे फर्स्ट ग्रीन रेटिंग सिस्टम द्वारा रेटिंग दी गई हो और यह काफी ज्यादा प्राऊड मोमेंट भी होने वाला है बिकॉज़ पूरी दुनिया की फर्स्ट ग्रीन मेट्रो दिल्ली मेट्रो थी और अब पूरे दुनिया का फर्स्ट ग्रीन रेटिंग सिस्टम वाला बुलेट ट्रेन हाई स्पीड प्रोजेक्ट भी भारत में बनाया जा रहा है।0..

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