आखिर क्यों भारत ने रूस के SPFS सिस्टम को दिया बडा झटका चीन से दोस्ती पडी भारी, पुतिन को लगा भरी बहुत बड़ा झटका

जैसा कि रूस के अंदर चीन काफी मजबूत होता जा रहा है। जिस वजह से भारत भी काफी सावधान हो रहा है।स्पेस मिशन से लेकर पनडुब्बियों के निर्माण में रूस कहीं ना कहीं चीन की सहायता कर रहा है।

 

 

बदले में चीन रूस में अपना निवेश बढ़ा रहा है। यहां तक कि रूस और चीन के बीच में क्षेत्रीय मुद्राओं में व्यापार हो रहा है। हालांकि रूस और चीन दोनों ही देश अपनी अपनी मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर का विकल्प बनाना चाहते हैं, लेकिन चीन का मानना है कि एशिया में वही एकमात्र ऐसा देश है जिसके मुद्राओं में व्यापार करने पर जोखिम कम होगा, लेकिन वहीं रूस भी अमेरिकी डॉलर से छुटकारा पाना चाहता है जिसके लिए रूस व्यापार के लिए क्षेत्रीय मुद्रा गोल्ड या फिर अपनी मुद्रा रूबल को बढ़ावा दे रहा है। यहां तक कि रूस ने अपना खुद का एसपीएफएस नाम का फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम भी बनाया है और उसका यह फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम बिल्कुल अमेरिका के पेमेंट मैच।

 

 

मैसेजिंग सिस्टम स्विफ्ट जैसा ही काम करता है। बता दें कि किसी भी बैंक संस्था या फिर किसी भी देश को डॉलर में व्यापार या लेनदेन करना है तो उसे अमेरिकी स्विफ्ट पेमेंट मैसेजिंग सिस्टम का सहारा लेना ही पड़ेगा क्योंकि बिना स्विफ्ट पेमेंट मैसेजिंग सिस्टम के डॉलर में लेन-देन नहीं किया जा सकता। लेकिन जैसा कि रूस अपने यस पी एफ एस फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम को अमेरिका के पेमेंट मैसेजिंग सिस्टम का विकल्प पर बनाना चाहता है, जिसके लिए रूस ब्रिक्स देशों को भी अपने फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम से जुड़ना चाहता है।

लेकिन अब भारत ने रूस को बड़ा झटका देते हुए फिलहाल और उसके फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है। दरअसल, चीन ईरान और वेनेजुएला समेत 11 देश रूस के फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम से जुड़ चुके हैं और ज्यादातर उन्हीं देशों ने रूस के फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम बाहर निकाल दिया है। हालांकि 2019 में भारत भी रूस के पेमेंट मैसेजिंग सिस्टम से जुड़ने की योजना बना रहा था, लेकिन उसके अंदर चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए और अमेरिका के साथ अपने हितों को ध्यान में रखते हुए भी भारत ने रूस के फाइनेंसियल मैसेजिंग सिस्टम से दूरी बनाए रखने का फैसला किया है और जैसा कि भारत एक बड़ा देश है।

 

 

ऐसे में भारत का यह फैसला रूस के ही एसपीएफएस के लिए बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है।विदेशों की अपनी स्पेस स्टेशन मौजूद होंगी लेकिन स्पेस मिशन को लेकर चीन की तैयारी है। दुनिया के लिए चिंता का विषय बनी हुई है क्योंकि चीन इतना घटिया देश है कि जब भी उसके स्पेस मिशन के साथ कोई भी दुर्घटना होती है तो चीन दुनिया कोई है।

जानकारी भी नहीं देता कि उसके रॉकेट का मलवा कहां गिरेगा जिससे यह पता चलता है कि चीन केवल अपने स्पेस मिशन के महत्वाकांक्षा को पूरा करना चाहता है और चीन को धरती पर मौजूद इंसानों की कोई भी चिंता नहीं रहती।

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