भारत ने तैनात किये ढाई लाख सैनिक | क्या भारत चीन नियंत्रित करने के लिए को बांग्लादेश का इतिहास दोहराएगा तिब्बत में ?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है तो दोस्तों इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है डिफेंस के क्षेत्र से चाइना की तरफ से मीडिया के अंदर प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर दिया है। एक के बाद एक नए दिन में चाइना की तरफ से बहुत बड़े दावे किए जाते हैं और दावे इतने बड़े होते हैं कि माउंट एवरेस्ट की चोटी भी छोटी पड़ जाए।

 

चीन ने पिछले दिनों बताया कि तिब्बत की जो सेना है वह हम खड़ी कर रहे हैं तिब्बत के लोगों को भारत की सेना के खिलाफ कल लड़ाने के लिए चाइना की आर्मी में भर्ती किया जा रहा है। उसके बाद खबर आई की चाइना ने तो बुलेट ट्रेन चला दी है।

160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चीन अपने सैनिकों को भारत के बॉर्डर पर ला सकता है। उसके बाद खबर आई थी चीन ने SRHO की तैनाती कर दी है।

भारत के बॉर्डर की तरफ यह सारी खबरें चीन किस लिए दिखा रहा है चीन इस  दिखा रहा है ताकि वह भारत के लोगों को मनोबल गिरा सके। भारत की सरकार का मनोबल गिरा सके और यह बता सके कि भारत के खिलाफ चीनी सेना की तैयारी पूरी है।

लेकिन दोस्तों वह कहते हैं ना कि जो बादल गरजते हैं, वह बरसते नहीं है और दोस्तों भारत की सेना भी चीन के इस मीडिया प्रोपेगेंडा का बिल्कुल जमकर जवाब दे रही है। चीन क्या मीडिया इस तरीके का प्रोपोगंडा करता है तो भारत वाले चीनी मीडिया की चड्डी उतार कर उन्हें नंगा कर देते हैं।

 

 

यही हुआ भारत के सीडीएस ने जब कहा कि चीन की सेना माउंटेन वॉर के लिए बनी ही नहीं है उसके बाद भारत की मीडिया में खबर आई कि चीन ने अपने 90 फ़ीसदी सैनिक ठंड के कारण पीछे हटा लिए हैं

और दोस्तों अब यह खबर आई है भारत की तरफ से कि भारत ने ढाई लाख सैनिकों की तैनाती कर दी है चाइना के बॉर्डर पर और दोस्तों यह जो टेस्ट चीन की सेना भारत के साथ कर रही है ना   चीन की सेना को बहुत बड़ी गलतफहमी हुई पड़ी है कि भारत यहां पर शांतिप्रिय है

हम कितने भी टेस्ट कर ले। भारत के ऊपर कोई भी असर नहीं होने वाला है। यह तो भारत की एक शांतिप्रिय नीतियां है और ना जाने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी क्या सोचे बैठे हैं कि वह आज दुश्मन को उसी की भाषा में जवाब देने के बारे में रणनीति तय कर रही हैं, लेकिन आप सोच कर देखिए कि चीन के इस तरीके के टेस्ट और शातिराना चलाएं।

चाले अगर चलती रही तो भारत अपनी रणनीति में कभी भी बड़ा फेरबदल कर सकता है। भारत तो अभी उसी की भाषा में जवाब देने की बात कर रहा है। लेकिन आप सोच कर देखिए कि अगर हमारी सेना का मनोबल और चीन के सैनिकों के खिलाफ हमारी मोर्चे बंदी इस कदर कि हो जाए कि हम तो भैया तिब्बत को बांग्लादेश की तरह आजाद करा कर ही छोड़ेंगे तो चीन वाले आखिरकार कितने दिन के मेहमान है।

 

 

यह जितने भी टेस्टिंग कर रहे हैं ना यह बाद में शांति की टेबल पर आ जाएंगे और समझौते की टेबल पर आ जाए। चीन के कमांडर शांति की वार्ता और भारत के प्रपोजल को रिजेक्ट कर रहे हैं, लेकिन अगर भारत की रणनीति मोर्चाबंदी अगर चीन के खिलाफ बांग्लादेश वाली हो जाती है

और सेना अगर यह बात सोच लेती है कि हम तो तिब्बत को भी बांग्लादेश की तरह आजाद कराकर छोड़ेंगे तो इन चीनियों को मौका नहीं मिलेगा। पीछे भागने के लिए। लेकिन यह सारी सिचुएशन आज यह साफ दिखा रही है कि चीन वाले अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। गाल वन क्लेस भी इन्होंने शुरू की और अब यह नया बखेड़ा छोड़ना चाहते हैं,

लेकिन जितने बकरे इन्होंने छेड़ने छेड़ले भारत भी इनकी एक-एक चोट का जवाब सौ सुनार की एक लोहार की बात से देने वाला है तो सौ यह भारत के ऊपर कर ले। लेकिन भारत में एक ऐसी चोट चीन को मारेगा कि तिब्बत बांग्लादेश की तरह आजाद हो जाएगा और फिर इन्हें रोने के अलावा और कोई मौका मिलेगा  नहीं।

क्या कहना चाहेंगे? भारत के ढाई लाख सैनिकों की तैनाती जो चाइना के बॉर्डर पर हो गई है और अब मोर्चा इस कदर का सजने लगा है कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सेना अग्रेशन नहीं दिखा रही है जितना अग्रेशन चाइना वालों के खिलाफ हमारी तैयारी चल रही है।

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