CHINA ने OLYMPICS 2021 में भारत के प्रदर्शन पर क्या बोला China’

रिसेंटली टोक्यो ओलंपिक्स खत्म हुए जिसमें भारत की परफॉर्मेंस की बात करें तो हम ने कुल 7 मेडल जीते। एक गोल्ड दो सिल्वर और चार ब्रॉन्ज मेडल हमने टोक्यो ओलंपिक के लिए 127 एथलीट फुट नाडु कादल भेजा था, जिनमें से मात्र साथ ने मेडल जीता है। कुल 93 देशों ने टोक्यो ओलंपिक में हिस्सा लिया था

जिनमें भारत के रेंक की बात करें तो हम 93 देशों में 48 से नंबर पर है। भारत को लेकर पाकिस्तान से कई सारी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जहां पाकिस्तान से भारतीय खिलाड़ियों की परफॉर्मेस के लिए ढेर सारी बधाई मिल रही है। कई सारे पाकिस्तानी लोग हमारी हॉकी टीम और जेवलिन थ्रोवर नीरज चोपड़ा की तारीफ कर रहे हैं।

तू भी चाइना ने भारतीयों पर तंज कसा है। जाने ने पैसे भारत के बारे में क्या बोला है उस पर आने से पहले चाइना की परफॉर्मेस बता दूं। सबसे पहले आपको पता होना चाहिए कि भारत की 127 एथलीट के मुकाबले चाइना ने कुल 431 यानी एथलीट्स भेजे थे

जिनमें से ओलंपिक्स कमेटी ने अपनी वेबसाइट पर 421 यानी 421 चाइनीस एथलीट को किया था। यानी यह भी एक बड़ा कारण है। भारतीय के कम मैडल आने का की हमारे खलिदा सबसे पहले कोलीफाई नहीं कर पाते हैं। कंप्लीट के कारण मेडल आने की प्रॉपर्टी भी काफी कम हो जाती है।

421 में से चाइना के अट्ठासी यानी 88 एथलीट्स ने टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीता। भारत के साथ और चाइना के 88 मेडल दोनों देशों के बीच जमीन आसमान का अंतर है, जबकि आबादी की बात करें तो दोनों देशों के लगभग आस पास है। चाहने की परफॉर्मेस की बात करें तो उसको 3 8 गोल्ड 32 सिल्वर और 18 ब्रांच मेडल मिले हैं।

यानी उसे गोल्ड सबसे ज्यादा मिले हैं जो दर्शाता की चाणक्य स्लिप फाइनेंस में जोक बिल्कुल नहीं आ जाते हैं, जबकि भारतीय मैडल टल्ली को देखा जाए तो हमारे पास सबसे ज्यादा ही चार ब्रॉन्ज मैडल हे जबकि एक गोल्ड यानि ब्राउन सबसे ज्यादा है जबकि चाइना की बात करें तो उसके पास ब्रॉन्ज नहीं बल्कि गोल्ड सबसे ज्यादा हैं।

टोक्यो ओलंपिक में चाइना के बाद दूसरे नंबर पर अमेरिका रहा लेकिन वह भी अपनी तुलना 48 वें नंबर पर भारत से कर रहा हे सरकारी अखबार शिनवा भारत की परफॉर्मेस परीक्षण आर्टिकल छापा है, जिसकी पहली लाइन पर उसने लिखा है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत का टोकियो ओलंपिक में अभियान एक मैडम के साथ खत्म हो गया है।

आर्टिकल में चुनवा ने लिखा है कि 1 पॉइंट 3 बिलियन यानी 130 करोड़ की आबादी वाले देश का ट्रैक रिकॉर्ड ओलंपिक में पिछले काफी दिनों से बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। दिल्ली बॉक्सिंग एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी के वाले से सिल्वा ने लिखा है कि हॉटस्पॉट की सीनियर का सबसे बड़ा कारण है।

भर्ती स्पोर्ट्स, फेडरेशन और एसोसिएशन को यह पर के सारे पॉलिटिशियन सेट करते हैं, उनको सपोर्ट के बारे में कुछ तो पता होता नहीं, लेकिन उस स्पोर्ट्स मैन का फ्यूचर तय करते हे साथ में भारत ने फौरन कोचेस को अनलिमिटेड समय के लिए हायर किया जाता है

जबकि उनको एक ओलंपिक के लेटेस्ट दिया जाना चाहिए और फिर उनकी परफॉर्मेस के आधार पर आगे उनका टेनियर और बढ़ाना चाहिए। इसके साथ स्टेट ओर सेंट्रल गवर्नमेंट खिलाड़ीयो को स्पोंसर करना चाहिए। सिनवा ने बेंगलूर की कबड्डी टीम के फिजियो के वाले से लिखा है कि जिस तरीके की भारतीय खिलाड़ियों को ट्रेनिंग या फिर कोचिंग की जाती है वह ओलंपिक ।

इंटरनेशनल स्टैंडर्ड से काफी लो है। साथ ही भारतीय खिलाड़ी गेम की लास्ट डेट में पैसे को अच्छे से हैंडल नहीं कर पाते हैं। उनके दिमाग से हारने का फेर फैक्टर हटाने की जरूरत है। शिनवा आगे लिखा कि जो भारतीय कॉन्टिनेंट में लंबित के लिए गया था, उसमें मैक्सिमम खिलाड़ी छोटे को रिमोट यानी दूर दराज किला कर गए थे,

जिन्होंने स्पोर्ट्स इसलिए चुना था ताकि वह केश रिवार्ड्स जीतकर अपनी अपनी फैमिली की फाइनेंसियल कंडीशन सुधर पाए। उनको फैमिली सपोर्ट मिलती है और कुछ सालों पहले तक तो भारतीय सरकार भी उनको सपोर्ट नहीं करती थी।

स्पोर्ट्स को भारत में दूसरी प्राथमिकता मिलती है। पहले सभी पेरेंट्स यानी मां बाप अपने बच्चों को पढ़ाई और जॉब कोर्सेस करवाने पर जोर देते हैं। शिनवा ने आगे लिखा कि पिछले कुछ सालों में भारत में सिचुएशन सुधरी साल 2014 और 2020 के बीच सेंट्रल गवर्नमेंट यानि मोदी सरकार ने इस लूट के लिए कई सारी स्कॉलरशिप स्कीम चलाई है।

आप उनको फाइनेंसियल गेट दी जा रही है। फौरन ट्रेनिंग इंटरनेशनल कंपटीशन कोचिंग कैंप इकवीमेंट्स के लिए अब भी सरकार को हर महीने ₹50000 के करीब दे रही है। साथ में शिनवा आगे लिखा है कि भारत में केसर स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी प्लान की जा रही है जो भविष्य में टैलेंटेड खिलाड़ियों को भारेगी।

किसी के साथ इस आर्टिकल में सीमा ने काफी कुछ लिखा था, लेकिन हमने उसमें से मोटे मोटे पॉइंट्स कवर की हैं, लेकिन चाइना के सरकारी अखबार शिनवा के इस आर्टिकल में जो लिखा गया है, क्या उससे आप सहमत हैं। हां या पीछे कमेंट करके बताएं।

 

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