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क्‍या वाकई पाक थी दुनिया को ताज महल देने वाले शाहजहां और मुमताज महल की मुहब्‍बत?

एक शहंशाह ने बनवा के हंसी ताजमहल सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है क्या शायर , क्या आशिक ,क्या कोई सियासतदार ताजमहल को जिसने भी देखा वह बस देखता ही रह गया ! दूर-दूर से लोग मोहब्बत की इस निशानी का दीदार करने आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और यादों को संजो कर लौट जाते हैं !

 

इस बेहद हसीन इमारत को देखने के बाद हर कोई इस के डिजाइन सफेद संगमरमर और उस पर हुई बेहद खूबसूरत नक्काशी की बात करता है लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि जिस मलिका की याद में इस इमारत को तामीर करवाया गया है उसी मुमताज महल की जिंदगी कैसी थी ?

क्या मुमताज महल को शहंशाह से वैसी ही पाकीजा मोहब्बत मिली जैसी पाकीजा या पवित्रता के साथ हम आज ताजमहल को प्रेम की निशानी के तौर पर देखते हैं ? नमस्कार आज हम बात करेंगे ताजमहल के सफेद संगमरमर से भी ज्यादा खूबसूरत मुमताज महल की !

तो चलिए बिना देरी किए शुरू करते हैं यह किस्सा शुरु होता है नूरुद्दीन मोहम्मद जहांगीर जो मुगल वंश का चौथा बादशाह बना और हिंदुस्तान के तख्त पर बैठा आशिक मिजाज जहांगीर की 20वी बेगम नूरजहां ईरानी परिवार में पैदा हुई बला की खूबसूरत नूरजहां के बारे में !

 

कहा जाता है कि इन्होंने 16 साल तक पर्दे के पीछे से मुगल सल्तनत को चलाया मुगल दरबार में नूरजहां का रुतबा बढ़ता गया तो जहांगीर ने उनके पिता एत्माद्दौला को वजीर बना दिया एत्माद्दौला के बेटे अबुल हसन असाफ खान के घर 27 अप्रैल 1593 को बेटी पैदा हुई जिसका नाम रखा गया अर्जुम्मन सीधे शब्दों में कहा जाए तो अर्जुम्मन चौथे मुगल बादशाहा जहांगीर की बीवी नूरजहां की भतीजी हुई कहते हैं

अर्जुम्मन एक बार आगरा के मीना बाजार में घूमने निकली यहीं पर पहली बार शहाबुद्दीन मुहम्मद खुल्लम ने उनको पहली नजर देखा और देखते ही दिल दे बैठे खुल्लम और अंजुमन की अप्रैल 1607 में सगाई पक्की हो गई उस वक्त अर्जुम्मन 14 साल की थी और खुर्रम 15 वर्ष के हो चुके थे !

करीब 5 साल बाद 10 मई 1612 को जब खुर्रम 20 के हुए और अर्जुम्मन 19 साल की हुई तो दोनों का निकाह करा दिया गया ! रोचक बात यह है कि जब खुर्रम और अर्जुम्मन की नजरें पहली बार मिली थी तब दोनों कुंवारे थे लेकिन दोनों की सगाई और शादी के बीच जो वक्त गुजरा उसमें खुर्रम की शादी हुई !

 

फारस की शहजादी क्बान्द्री बेगम से हो चुकी समय बिता और जहांगीर के बाद खुल्लम ने मुगल तख्त की कमान संभाली ! बादशाहा बनने के बाद खुर्रम शाहजहां बन गए और उनकी सबसे प्यारी बेगम अर्जुम्मन को मुमताज महल का खिताब दिया गया ! शाहजहां और मुमताज के 14 बच्चे हुए मुगल इतिहास के दो सबसे चर्चित किरदार दारा शिकोह और औरंगजेब भी मुमताज महल की ही कोख से पैदा हुए !

दारा शिकोह मुमताज महल की तीसरी औलाद थे और पहला बेटा दारा शिकोह को ना केवल कुरान कंठस्थ थी बल्कि उसने कई हिंदू धार्मिक ग्रंथों का अनुवाद भी कराया ! मुगल इतिहास का दूसरा अहम किरदार औरंगजेब मुमताज महल की छठी संतान था बाद में दारा शिकोह और औरंगजेब की दुश्मनी हुई और औरंगजेब ने मुगल तख़्त संभालने के बाद दारा शिकोह को सजा-ए-मौत दे दी थी !

इतिहासकारों के मुताबिक 19 साल की उम्र में शादी करने वाली मुमताज महल 38 – 39 वर्ष की उम्र में तकरीबन हर साल गर्भवती रही और उनकी मौत भी 14वी संतान को जन्म देते हुए हो गई! शाहजहांनामा मे मुमताज महल के बच्चों के बारे में विस्तार से जिक्र मिलता है

 

इसके मुताबिक मुमताज महल ने सबसे पहले 1613 में बेटी को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया शहजादी हुराला निसाह इसके बाद अप्रैल 1614 में मुमताज दोबारा मां बनी इस बार उन्होंने जहांआरा को जन्म दिया जो बाद में मुगल सियासत का बेहद अहम किरदार बनी , मार्च 1615 में मुमताज महल ने पहले बेटे दारा शिकोह को जन्म दिया इसके बाद अगले ही साल जुलाई 1616 मे शा सूजा का जन्म हुआ ,

सितंबर 1617 में शहजादी रोशन आरा और इनके बाद नवंबर 1618 में मुमताज महल के गर्भ से पैदा हुआ औरंगजेब जो बाद में बेहद सफल शासक तो बना लेकिन उसकी क्रूरता के किस्से आज भी हिंदुस्तान के इतिहास में दर्ज है ! इस तरह मुमताज महल ने 1613 से लेकर 1631 तक करीब-करीब हर साल एक एक बच्चे को जन्म दिया !

मुमताज महल के कई बच्चों की मौत भी हुई उनकी पहली बेटी 3 साल की उम्र में चल बसी ! उमेद बक्श भी 3 साल में मर गया , सुरैया बानो का 7 साल की उम्र में इंतकाल हो गया , लुक अल्लाह भी 2 साल की उम्र में काल के गाल में समा गया , दौलत अफजा की मौत 1 साल की उम्र में हुई और हुस्न आरा 1 साल की होने से पहले ही मर गई !

 

इस तरह मुमताज महल के 14 बच्चों में से 6 की मौत हो गई मरने से पहले मुमताज महल ने जिस संतान को जन्म दिया उसका नाम रखा गया गोह रारा जिसकी जिंदगी काफी लंबी रही दरअसल 14वी संतान को जन्म देते वक्त मुमताज महल को मालूम था कि अब उनका बचना मुश्किल है इसलिए उन्होंने शाहजहां को पास बुला कर कहा मेरी आखिरी ख्वाहिश है अगर हो सके तो उसे पूरा करने की कोशिश करिएगा बादशाह ने कसम खाते हुए कहा तुम्हारी हर इच्छा पूरी की जाएगी मुमताज महल ने कहा मेरे मरने के बाद एक ऐसा मकबरा बनवाए जो आज तक इस दुनिया में ना बनवाया गया हो !

मुमताज महल की इतनी ख्वाहिश ने ताजमहल की नींव रखी मुमताज की मौत के गम में शाहजहां ने पूरी सल्तनत में शोक का एलान कर दिया ! मुगल बादशाह ने पूरे 2 साल मुमताज महल की मौत का गम मनाया डब्ल्यू वेगली ऑफ सैंडी देसाई ने अपनी किताब शाहजहांनामा और इनायत खान में लिखा है मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां ने संगीत सुनना छोड़ दिया

लगातार रोने की वजह से उनकी आंखें कमजोर हो गई पहले जब उनका एक भी बाल सफेद होता तो वह उसे खुदवा दिया करते थे लेकिन मुमताज महल की मौत के एक हफ्ते के बाद ही उनके बाल तेजी से सफेद होने लगे वादे के मुताबिक शाहजहां ने मुमताज महल की मौत वाले साल 1631 में ही ताजमहल का निर्माण शुरू कराया !

 

ताजमहल का निर्माण कार्य पूरा होने में 22 साल लगे इसे बनाने के लिए शाहजहां ने यमुना किनारे उसी जगह को चुना जहां पर अक्सर मुमताज महल घूमने जाया करती थी ! 20 हजार मजदूरों ने दिन रात काम किया तब जाकर 1653 में निर्माण कार्य पूरा हुआ ! शाहजहां ने मुमताज महल के साथ निकाह से पहले और निकाह के बाद भी कई और शादियां की उनकी बीवियों के नाम है क्बान्द्री , कंधारी बेगम , अकबराबादी महल , मुमताज महल , हसीना बेगम , मोती बेगम ,

कुदसिया बेगम , फतेहपुरी महल और सरहिंदी बेगम इस तरह कुल संख्या 8 हुई लेकिन कुछ इतिहासकार शाहजहां की बीवियों की संख्या ज्यादा बताते हैं कहा यह भी जाता है कि मुमताज महल के इंतकाल के कुछ दिन बाद ही मुमताज महल की बहन से शाहजहां ने शादी कर ली थी ! शाहजहां की बीवियों के साथ उनके हरम की भी खूब चर्चे मिलते हैं जिसमें हजारों औरतों को रखा गया था

इतिहासकार की मानें तो शाहजहां के काल में हरम के अंदर 8000 से ज्यादा रखैल थी जो कि किसी भी मुगल बादशाह के समय में सबसे ज्यादा संख्या रही यह बात सही है शाहजहां ने मुमताज महल की याद में ताजमहल को तामीर करवाया था यह बात भी सही है कि ताजमहल दुनिया की बेहद खूबसूरत इमारत में से एक है लेकिन सवाल यह है कि ताजमहल को मोहब्बत की निशानी कहना कितना जायज है ,बहुत से लोग ऐसा तर्क देते हैं

 

कि उस जमाने में कई शादियों का चलन था और राजे महाराजे हरम में रखेले रखा करते थे लेकिन इतनी बीवियां होने के बाद भी शाहजहां मोहब्बत तो मुमताज से ही करते थे मगर यहां पर एक दूसरा तर्क भी है नूरजहां के साथ जहांगीर ने 20वी शादी की थी लेकिन उसने नूर जहां से शादी के बाद एक भी निकाह नहीं किया !

जहांगीर का ही उदाहरण उसके बेटे शाहजहां पर लागू करें तो अगर मुमताज से बेपनाह मोहब्बत करता था तो उसने मुमताज की मौत के बाद एक और शादी क्यों की इतना ही नहीं मुमताज महल से पहली नजर का प्यार होने के बावजूद भी शाहजहां ने पहले मुमताज महल से शादी नहीं की थी बल्कि उसकी पहली शादी पारस की शहजादी क्बान्द्री बेगम से हुई थी ! ऐसे में शाहजहां और मुमताज महल के बीच पाकीजा मोहब्बत के दावों पर सवाल खड़े होते हैं

हमने तो इतिहास में दर्ज सारे फैक्ट आपके सामने इमानदारी से रख दिए अब आप तय करे कि क्या ताजमहल को पवित्र प्रेम की निशानी माना जाए या सिर्फ एक खूबसूरत इमारत क्योंकि सच तो यह है कि ताजमहल के आकर्षण के पीछे सिर्फ एक खूबसूरत इमारत नहीं है बल्कि लोग ताजमहल को अलग नजर से भी इसलिए देखते हैं क्योंकि ताजमहल को मोहब्बत की निशानी कहा जाता है ! अब इसे मोहब्बत की निशानी कहना सही है ? कॉमेंट बॉक्स पर सवाल व राय जरूर रखें वीडियो पसंद आए तो वीडियो को लाइक , शेयर जरूर करें और हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करना ना भूलें !

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