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99% हिन्दुओ को नहीं पता की रामायण के बाद हनुमान जी आखिर कहाँ गए? सबसे बड़ा रहस्य

महाशक्तिमान महाज्ञानी भक्तों में सबसे प्रिय महावली हनुमान जी इतिहास के वो किरदार जिनकी भक्ति और निष्ठा की मिसालें दी जाती है भगवान शिव के वो अंश जिनकी समानता न कभी इतिहास में की जा सकती है न ही भविष्य में की जा सकेगी और आज हम आपको दिखाने बाले है ऐसे सबूत जो आपको साबित करते है की हनुमान जी आज भी जिन्दा है और हमारे आस पास ही किसी रूप में है !

कमेंट में जय श्री राम जरूर लिखें ! हनुमान जी की शक्ति अपार थी रामायण काल में भी हनुमान जी ने अपनी शक्ति को उचतम स्तर तक पहुँचाया ही नही क्योंकि अगर ऐसा हुआ होता तो लंका का विनाश वो कुछ ही क्षणों में कर देते ! हनुमान जी को अमरत्व का बरदान हासिल था और वो काल के अंत तक धरती लोक तकविराजमान रहेंगे !

हनुमान जी के जीवित होने के सबूत दिखाने से पहले बात कर तेहै की रामायण के बाद हनुमान जी कहाँ गए ? दरअसल रामायण में भी बताया है की श्री राम के धरती छोड़ने तक हनुमान जी अयोध्या में ही उनकी सेवा करते रहे और उसके बाद उन्होंने वन को ही अपना निवास स्थान बनाया उसी के बाद त्रेता युग का अंत हुआ और द्वापर युग का प्रारम्भ हुआ द्वापर युग में भी हनुमान जी का जिक्र दो बार हुआ है !

पहली बार जब भीम जंगल में थे तब उन्हें एक बजुर्ग बानर मिला जब भीम ने उस बानर को रास्ते से हटने को कहा तो उस बानर ने कहा की अब इस उम्र में मुझ में इतनी शक्ति नही है तुम ही मुझे रास्ते से हटा दो ! इसके बाद घमंड से चूर भीम ने पूरा प्रयास किया लेकिन वो उस बानर की पूंछ तक न हिला सका !

तब भीम को समझ आया की वो कोई साधारण बानर नही बल्कि स्वयं हनुमान जी है जो भीम को घमंड छोड़ने का सबक देने आए थे !इसके बाद भी हनुमान जी अर्जुन के रथ पर ध्वज बनकर पूरे महाभारत युद्ध में उनके साथ रहे अंत में जब हनुमान जी अपने असली रूपमें आए और वहां से चले गए तब वो रथ भी राख बन गया !

जब अर्जुन ने श्री कृष्ण से इसका कारण पूछा तो श्री कृष्ण ने बताया की वो हनुमान जी ही थे जिसके कारण उनके रथ को कुछ नही हुआ ! वरना इतने विनाशक अस्त्रों के कारण उनका रथ कभी भी टिक नही सकता था ! इस तरह हनुमान जी ने महाभारत काल में भी अपनी उपस्थिति दर्ज़ करवा दी !

इसके बाद कलियुग में भी हनुमान जी की बातें आपको सुनने को मिल जाएगी चीन , इंडोनेशिया , कम्बोडिया में भी अलग अलग नामों से आपको हनुमान जी की कहानियां सुनने को मिल जाएगी ! अफ्रीका से लेकर अमेरिका तक शक्तिशाली बानर के जिन्दा होने की आज भी बातें की जाती है !

14 वीं सदी में ऋषि माधवाचार्य ने हनुमान जी से साक्षात् भेंट होने की बात की थी 17 वी सदी में तुलसीदास जी ने बताया था की हनुमान जी ने उन्हें राम चरित मांनस लिखने के लिए प्रेरित किया था ! उसके बाद भी कई साधू संतों ने हनुमान जी से मिलने या उन्हें देखने का दावा किया !

अब अगर बात करे हनुमान जी के जिन्दा होने के सबूतों के बारे में तो आप गिन भी नही पाओगे ! श्रीलंका में एक कबीला है जिसे मातंग कबीला कहा जाता है इस कबीले के लोगों को किसी संत से कम नही माना जाता क्योंकि उनकी मानसिक सहनशीलता और विलक्ष्ण गुण उन्हें बाकियों से अलग करते है

उनका आज भी मानना है की हनुमान जी हर 41 साल बाद उनसे मिलने आते है और ज्ञान देकर जाते है यही ज्ञान उनकी आत्मिक शान्ति को स्थाई बनाए रखता है कई लोग इसे सच नही मानते लेकिन श्रीलंका और दक्षिण भारत में कई विशाल पैरों के निशाँनमिले है जिसे वैज्ञानिक भी सही मान चुके है !

आज वैज्ञानिक इंसानों को होमोसेपियंस मानते है उनका भी मानना है की इंसानों की तरह ही आज से 10 लाखसाल पहले अलग स्ट्रक्चर बाली प्रजातियाँ भी थी कई प्रजातियाँ जिनका शरीर हमसे भी कहीं ज्यादा बड़ा था यह प्रजातियाँ लुप्त हो गई लेकिन होमोसेपियंस अब तक बच पाए !

आज भी अमेरिका और कई अन्य देशों में बानर जैसे शरीर बाले इंसानों को देखे जाने की खबरें मिलती रहती है हम अपने ही धर्म में हनुमान जी के अस्तित्व को नकारते है वहीँ अमेरिका और कई अन्य देशों में बानर देव की पूजा की जाती है !अमेरिका में प्राचीन बानर देव का मंदिर मिला जिसकी मूर्तियों की बनावट हनुमान जी से पूर्णत मिलती है वहां की प्राचीन गाथाओं में भी बानर देव को अमरही माना जाता है !

हनुमानजी ने वरदान से अमरत्व को हासिल किया था और वो कलयुग के अंत तक धरती लोक पर ही विराजमान रहेंगे जब कल्कि अवतार अधर्म का अंत करेंगे और अधर्म की स्थापना करेंगे तब हनुमान जी भी उस महाशक्ति में लीन हो जाएंगे !

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