गॉड मदर के नाम से फेमस इस महिला के नाम पर दर्ज है 525 केस, गाँव से निकलकर ऐसे बनी डॉन

दोस्तों बॉलीवुड में ऐसी कई फिल्मे है जोकि सत्य घटनाओं के उपर बनी है इन्ही में से एक है गॉडमदर.  इस फिल्म में शबाना आजमी ने गॉडमदर का किरदार निभाया था. इस फिल्म को अलग अलग श्रेणी में 6 नेशनल अवार्ड मिले थे. फिल्म को लेकर दावा किया गया था

कि ये वास्तविक घटना पर बनी है और फिल्म में किरदार का नाम संतोकबेन था. जिन्हें लोग डर के मारे गॉड मदर कहा करते थे. कुछ लोगो का कहना है कि संतोकबेन के घर की नालियों से पानी की जगह खून बहा करता था. आइये जानते है कैसे संतोकबेन गॉड मदर बन गयी ..

साल 1980 में संतोकबेन अपने पति सरमन जडेजा के साथ काम की तलाश में गुजरात के पोरबन्दर आई थी. यहाँ सरमन को कपड़ा मील में काम मिल गया लेकिन उस समय देबू बाघेर नाम का गुंडा हफ्ता वसूली करता था. एक दिन जब उसने सरमन जडेजा से पैसे मांगे तो उन्होंने देने से मना कर दिया.

जिसके बाद देबू ने उन्हें थप्पड़ मारा था लेकिन सरमन भी कहाँ चुप बैठने वाले थे दोनों में लड़ाई हुई और सरमन के हाथो देबू वाघेर मारा गया. अब मील का सारा काम सरमन जडेजा के कब्जे में आ गया और उनका रास्ता ही बदल गया. धीरे धीरे उनका व्यापार तरक्की करने लगा और उनके कई दुश्मन बन गये थे.

1986 में विरोधी गिरोह के कालिया केशव ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर सरमन की हत्या कर दी. सरमन के छोटे भाई को जब इस बात का पता चला तो वे फौरन लन्दन से लौट आये. उन्होंने भाई की मौत का बदला लेने के लिए एक गिरोह बनाया लेकिन संतोकबैन ने उन्हें रोका और गैंग की लीडर बनने की बात कर दी.

घर का चूल्हा चौका करने वाली संतोकबेन ने अपने पति की हत्या करने वालो पर इनाम रख दिया था. उन्होंने केशव कालिया समेत 14 लोगो को मारने वाले के लिए 1 लाख रूपये का इनाम रखा था. खबरों की माने तो एक गोली संतोकबेन ने भी चलाई थी.

जब एक साथ 14 लोगो को मारा गया तो पुरे पोरबन्दर में संतोकबेन का आतंक छा गया था. जिसके बाद लोग उन्हें गॉडमदर कहकर बुलाने लगे थे. इस तरह संतोकबेन ने अपने पति की हत्या करने वालो को मारकर पति की मौत का बदला लिया था.

संतोकबेन गरीबो की सहायता भी करती थी जिसके बाद वे गरीबो की मसीहा बनकर सामने आई थी. उनके डर का आंतक इस तरह था कि अगर उनके घर की नाली से रंग भी बहे तो लोगो को लगता था कि खून बह रहा है. बाद में संतोकबेन की राजनीति में दिलचस्पी बढने लगी थी

और उन्होंने 1990 में पहली बार विधानसभा चुनाव में जनता दल का टिकट लिया था. वे 35 हजार वोट से जीत हासिल कर पहली महिला विधयाक बनी थी. लेकिन 1995 में कांग्रेस के कैंडीडेट के लिए उन्हें अपना पर्चा वापिस लेना पड़ा था. आपकी जानकारी के लिए बता दें

कि गरीबो की मसीहा गॉड मदर संतोक बेन और उनके गैंग पर हत्या, अपहरण, रंगदारी जैसे 525 मामले दर्ज किये गये थे. बाद में संतोकबेन को गॉड मदर फिल्म के बारे में पता चला तो उन्होंने डायरेक्टर के खिलाफ केस कर दिया था. जिसके बाद डायरेक्टर ने बताया कि फिल्म उनके जीवन पर नही बनाई गयी है. लेडी डॉन के नाम से प्रसिद्ध हुई संतोकबेन की हार्ट अटैक से साल 2011 में मौत हो गयी थी और उनका कहानी उनके साथ ही खत्म हो गयी …

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