सूर्य को अर्घ्य देने की प्रथा का वैज्ञानिक रहस्य

सूर्य को जल चढ़ाने से हमारे व्यक्तित्व पर सीधा असर पड़ता है। चूकिं सूर्य को सभी ग्रहों के स्वामी है, इसलिए अगर वो प्रसन्न हो जाएं तो बाकी के ग्रह अपने आप कृपा बरसाएंगे। पुराणों में सूर्य की उपासना को सभी रोगों को दूर करने वाला बताया गया है। वहीं हिंदू धर्म के मुताबिक सूर्य को जल देने से आपके जीवन में संतुलन आती है।

जेमान्यता है कि इनकी कृपा दृष्टि से रोग और शोक नष्ट हो जाते हैं। जब श्री विष्णु धरती पर श्रीराम रूप में अवतरित हुए तो वो भी अपने दिन का आरंभ सूर्य नारायण की पूजा के उपरांत करते थे। दरअसल, सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्‍योंकि हर कोई इनके साक्षात दर्शन कर सकता है।

 

✴️सूर्य कृपा के लिए चढ़ाएं जल

 

किसी भी व्‍यक्‍त‍ि की कुंडली में मौजूद सूर्य ग्रह को पिता या ज्येष्ठ का दर्जा दिया जाता है। जिस जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति सही ना हो या उनका ताप अधिक हो तो उसे सूर्य को जल चढ़ाने की सलाह दी जाती है।

लेकिन कई बार ऐसा होता है कि नियमित तौर जल चढ़ाने के बाद भी कोई अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो पाते। ऐसे हालातों इन उपायों से विश्वास उठने लगता है, जोकि किसी भी रूप में सही नहीं है। हो सकता है आप कुछ ऐसा कर रहे हों जिससे वह उपाय विफल हो रहा हो, या फिर आपका तरीका सही ना हो।

 

✴️सूर्य को जल देने की व‍िध‍ि

 

1. सूर्य देव को जल चढ़ाने का सबसे पहला नियम यह है कि उनके दिखने के एक घंटे के अंदर उनको अर्घ्‍य देना चाहिए। या फिर यह समय सुबह 8 बजे तक का ही है। नियमित क्रियाओं से मुक्त होकर और स्नान करने के बाद ही ऐसा किया जाना चाहिए।

2. सूर्य को जल देते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर ही होना चाहिए। अगर कभी पूर्व दिशा की ओर सूर्य नजर ना आएं तब ऐसी स्थिति में उसी दिशा की ओर मुख करके ही जल अर्घ्य दे दें।

3. सूर्य को जल देते समय आप उसमें पुष्प और अक्षत (चावल) मिला सकते हैं। साथ ही साथ अगर आप सूर्य मंत्र का जाप भी करते रहेंगे तो आपको विशेष लाभ प्राप्त होगा

4. लाल वस्त्र पहनकर सूर्य को जल देना ज्यादा प्रभावी माना गया है, जल अर्पित करने के बाद धूप, अगबत्ती से पूजा भी करनी चाहिए।

5. अर्घ्य देते समय हाथ सिर से ऊपर होने चाहिए। ऐसा करने से सूर्य की सातों किरणें शरीर पर पड़ती हैं। सूर्य देव को जल अर्पित करने से नवग्रह की भी कृपा रहती है।

6. इसके बाद तीन परिक्रमा करें।

7. मनोवांछित फल पाने के लिए प्रतिदिन इस मंत्र का उच्चारण करें-

ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित

फलम् देहि देहि स्वाहा।।

 

✴️तांबे के पात्र का करें प्रयोग

 

सूर्य को जल देने के लिए शीशे, प्लास्टिक, चांदी… आदि किसी भी धातु के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सूर्य को जल देते समय केवल तांबे के पात्र का ही प्रयोग उचित है।

साथ ही सूर्य को जल चढ़ाने से अन्य ग्रह भी मजबूत होते हैं। कुछ लोग सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में गुड़ या चावल भी मिला लेते हैं। ये अर्थहीन है, इससे प्रभाव कम होने लगता है।

 

✴️सूर्य को जल देने का वैज्ञानिक महत्व

 

स्वस्थ रहने के लिए जितनी शुद्ध हवा आवश्यक है, उतना ही प्रकाश भी आवश्यक है इसीलिए कहा जाता है कि प्रकाश में मानव शरीर के कमजोर अंगों को फिर से बलशाली और एक्टिव बनाने की अद्भुत क्षमता है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर हमारे पूर्वजों ने सूर्य को अर्घ्य देने का विधान बनाकर इसे धार्मिक रूप दे दिया। सुबह प्रभात बेला में या संध्योपासना कर्म और पूजा-अर्चना में सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। हाथ की अंजुलि में जल लेकर तथा गायत्री मंत्र बोलते हुए सूर्य की ओर मुंह करके सूर्य को जल समर्पित करना ‘सूर्य अर्घ्य’ कहा जाता है। सूर्य के महत्व से सभी परिचित हैं। सूर्य से ही प्रकाश है। वेदों में सूर्य को आंख कहा गया है।

 

सूर्य में सात रंग की किरणें हैं। इन सप्तरंगी किरणों का प्रतिबिंब जिस किसी भी रंग के पदार्थ पर पड़ता है, वहां से वे पुन: वापस लौट जाती हैं लेकिन काला ही ऐसा रंग है जिसमें से सूर्य की किरणें वापस नहीं लौटतीं। हमारे शरीर में भी अलग-अलग रंगों की विद्युत किरणें होती हैं, अत: जिस रंग की कमी हमारे शरीर में होती है, सूर्य के सामने जल डालने यानी अर्घ्य देने से वे उपयुक्त किरणें हमारे शरीर को प्राप्त हो जाती हैं क्योंकि आंखों की पुतलियां काली होती हैं, जहां से सूर्य की किरणें वापस नहीं लौटतीं, अत: वह कमी पूरी हो जाती है। वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि सूर्य की किरणों का प्रभाव जल पर बहुत जल्दी पड़ता है, इसलिए सूर्य को अभिमंत्रित जल का अर्घ्य दिया जाता है। सूर्य को अर्घ्य देने का यही वैज्ञानिक रहस्य है।

 

एक और कारण सूर्य अर्घ्य का यह है कि सूर्य का सीधा संबंध हमारे स्वास्थ्य से है। सूर्य एक प्राकृतिक चिकित्सालय है। उससे हमारी चिकित्सा होती है। सूर्य की सप्तरंगी किरणों में अद्भुत रोगनाशक शक्ति है। सुबह से शाम तक सूर्य अपनी किरणों से, जिनमें औषधीय गुणों का अपार भंडार है, अनेक रोग पैदा करने वाले कीटाणुओं का नाश करता है।

 

वैज्ञानिक प्रयोगों से यह सिद्ध हो चुका है कि जो टी.बी. के कीटाणु उबलते पानी से भी जल्दी नहीं मरते, वे सूर्य के तेज प्रकाश से शीघ्र नष्ट हो जाते हैं फिर दूसरे जीवाणुओं का नाश होने में संदेह ही क्या है इसलिए जब हम सूर्य के सामने खड़े होकर जल से अर्घ्य देते हैं तो सूर्य की किरणें हमारे शरीर पर पड़ती हैं, जिससे रोग उत्पादक सूक्ष्म-से-सूक्ष्म जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार सूर्य की किरणें रोगाणुओं से हमारी रक्षा करती हैं।

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