शकुंतला एक्सप्रेस : इस ट्रैन को भारत में चलाने के लिए ब्रिटिश 1 करोड़ 20 लाख रुपये लेते है।

भारत में प्रतिदिन लाखों करोड़ो लोग ट्रैन से सफर करते हैं ! आज भी हम ट्रेन से हजारों km दूर जाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं ! हालांकि यह ट्रेने ब्रिटिश द्वारा दी गयी भारत को एक तोफा था पर क्या आपने कभी सोचा हैं की भारत में एक ऐसी भी ट्रेन हैं ! जो आज भी ब्रिटिशो द्वारा चलाई जाती हैं और आज भी भारत को इसका मुआवजा ब्रिटिशों को देना पड़ता हैं ! तो चलिए आज के इस  में हम उसी ट्रेन के बारे में कुछ इंट्रेस्टिंग फैक्ट्स देखने वाले हैं !

इस ट्रेन का नाम हैं शकुंतला एक्सप्रेस ! इस रेल ट्रैक पर शकुंतला एक्सप्रेस के नाम से सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन चलती हैं ! अमरावती से मिर्जापुर के 189 km के इस सफर को वह 6 से 7 घंटे में पूरा करती हैं ! अपने इस सफर में शकुंतला एक्सप्रेस अचलपुरी एवं माल समेत 17 छोटे बड़े स्टेशनों पर रूकती हैं ! 100 साल पुरानी 5 डिब्बों की इस ट्रेन को 70 साल तक स्टीम का इंजन खीचता हैं ! इसे 1921 में ब्रिटेन के मेंस्टेचर में बनाया गया था ! 15 अप्रैल 1994 को शकुंतला एक्सप्रेस के स्टीम इंजन को डीजल इंजन से रिप्लेस कर दिया गया था ! इस रेल रूड पर लगे सिगनल आज भी ब्रिटिश कालीन हैं ! इनका निर्माण इंग्लैंड के leevarful में 1895 में हुआ था ! 7 कोच वाली इस पैसेंजर ट्रैन में प्रतिदिन 1 हजार से ज्यादा लोग ट्रेवल करते हैं ! इस रूड पर चलने वाली शकुंतला एक्सप्रेस के कारण इसे शकुंतला रेल रूड के नाम से भी जाना जाता हैं !

अमरावती का इलाका अपने कपास के लिए पुरे देश में फेमस था ! कपास को मुंबई पोट तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने इसका निर्माण करवाया था ! 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीय करण कर दिया गया ! सिर्फ यही रूड भारत सरकार के आधीन नहीं था ! इस रूड के बदले भारत सरकार हर साल इस कंपनी को 1 करोड़ 20 लाख की रॉयल्टी देती हैं ! आज भी इस ट्रैक पर ब्रिटेन की इस कंपनी का कब्ज़ा हैं ! इसके देख रेख की पूरी जिम्मेदारी इस पर ही हैं ! हर साल पैसा देने के बावजूद यह ट्रैन बेहद जर्जर हैं ! रेलवे सूत्रों का कहना हैं की पिछले 60 साल से इसकी मरमद भी नहीं हुई हैं ! इस ट्रैन को खींचने वाले इंजन की अधिकतम गति 20 km प्रति घंटे तक ही जाती हैं ! इस सेंटर रेलवे के 150 कर्मचारी इस घाटे के मार्ग को संचालित करने में आज भी लगे हैं ! इस ट्रैक पर चलने वाली शकुंतला एक्सप्रेस पहली बार 2014 में और दूसरी बार अप्रैल 2016 में बंद कर दिया गया था !

स्थानिक लोगों की मांग और कुछ सांसद की दबाव में सरकार को फिर से ये रेलवे लाइन शुरू करनी पड़ी ! वहां के कुछ सांसद का कहना हैं की यह ट्रेन अमरावती के लोगों की लाइफ लाइन हैं ! अगर यह बंद हुई तो गरीब लोगों को बहुत दिक्कत होगी ! भारत सरकार ने इस ट्रैन को कई बार खरीदने का प्रयास भी किया लेकिन तकनीकी कारणों से वह अभी तक तो संभव नहीं हो सका हैं !

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