भारत के लिए चीन और श्रीलंका ने क्यों खड़ी की बड़ी मुसीबत ?

जब भी आप किसी तीर्थ स्थल पर जाते होंगे वहां पर आपने भी देखा होगा कि अक्सर श्रद्धालु भगवान के आगे पूरा लेटकर नतमस्तक हो जाते हैं। ठीक वही हाल आज की डेट में चाइना के सामने श्री लंका का है क्योंकि श्री लंका ने चाइना और खासकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के प्रति अपनी वफादारी दिखाने की सारी हदें पार कर दी हैं जो कदम आज श्री लंका ने उठाया है।

उसे साफ हो जाता है कि ना श्री लंका अपनी पिक और ना कभी वह आगे सीखने वाला है। वैसे तो चाइना भारत के सभी पड़ोसी देशों के ऊपर डोरे डाल रहा है। लेकिन इन सबमें एक देश श्री लंका जो खुद ही चाइना के आगे उसके जाल में फंसते जा रहा है, लेकिन अब यह सोचिए कि श्री लंका और चाइना के बीच में क्या पक रहा है, यह उन्हीं की है।

देखें भारत की नई तो अभी बिल्कुल गलत सोच रहे हैं क्योंकि चाइना श्री लंका में पैर इसीलिए पसार रहा हैकि भारत को सुत साइड से भी घेरा जा सके बस इसी कारण से श्रीलंका के प्रधानमंत्री राजपक्षे और चाइनीस प्रेसिडेंट शी जिनपिंग का ब्रोमांस भारत के लिए कहीं ना कहीं बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।

हमारी सुरक्षा में बड़ी सेंध लगा सकता है क्योंकि जिस तेजी से श्रीलंका चाइना डेट ड्राफ्ट में फंसते जा रहा है, कल को चाइना की लंका को ब्लैकमेल करके यहां पर अपनी मिलिट्री भी बिठा सकता है जहां पर अपने नेवल एसेट्स डिप्लोइ कर सकता है। यह श्री लंकन सरकार से मिलिट्री बेस के लिए जगह मान सकता है। वैसे आप में से कई लोगों को भी है।

सुनने में अटपटा लग रहा होगा। लेकिन सच्चाई यही है कि श्रीलंका और चाइना दोनों देश अब भेद करीब आ गए हैं। साथ में आ जाओ श्री लंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने भारत पर तंज कसते हुए जाना की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं। वह अपने आप में बड़ा कुछ कहते हैं। यह तो आपको पता ही होगा कि चाइना की कम्युनिस्ट पार्टी के गठन के 100 साल पूरे होने पर पिछले कुछ हफ्तों से पूरे के पूरे चाइना में बड़ा उत्सव मनाया जा रहा था।

वहां पर कई सारे फंक्शन हुए परेड हुई रैली हुई भाषण हुए और कई सारे कार्यक्रम भी चाइना में यह सब होना तो चलो समझ आता भी है लेकिन आपको हैरानी होगी। यह जानकर कि श्रीलंका ने भी चाइना की कम्युनिस्ट पार्टी का 100 स्थापना साल मनाया है जिसके चलते श्रीलंका ने चाइना के लिए नए सिक्कों का भी ऐलान कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने एक ऑनलाइन वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया जिसमें उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना की खुलकर तारीफ की लेकिन जो शब्द उन्होंने इसके लिए चुने उसको भी सुनना चाहिए क्योंकि यह सब कहीं ना कहीं भरत की तरफ इशारा करते थे।

महिंदा राजपक्षे ने कहा कि चीन ने कभी भी अपनी राजनीतिक विचारों को दुनिया को थोपने की कोशिश नहीं की है। उन्होंने कहा कि चीनी कभी भी दूसरे देशों के मामले में दखल देने की कभी नहीं समझी। किसी देश की आजादी को संप्रभुता के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात होती है।

इसीलिए अन्य देशों को चीन के साथ संबंध बनाने में कभी भी की चाहत नहीं होती है क्योंकि उन्हें अपनी आजादी को बरकरार रखने की इजाजत मिलती है। श्रीलंका के साथ भी ऐसा ही है जी बजे की दुनिया के ज्यादातर दरवाजे चीन के लिए खुले हैं। राजपक्षे ने आगे कहा कि यह स्पष्ट है कि आने वाली सदी में भी चीन एशिया की अगवाई करेगा ।

दुनिया के दो खेमों में बंट जाने की अहमियत बिल्कुल खत्म हो गई है। इसके में बाजी के कारण एशिया और अफ्रीका के कई देशों को कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। चीन इन सभी देशों को ऐतिहासिक काम किया है। दो ध्रुवीय विश्व के कारण दुनिया को जितना की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।

वह चीनी था जिसने दुनिया को इस मुश्किल से उभरा है। चाइना की तारीख में महिंदा राजपक्षे ने कुछ बोला लेकिन? के दिन वाली बात यह है कि श्रीलंका ने चाइना के सम्मान में कुछ सिक्के भी जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक श्रीलंका के सेंट्रल बैंक ने इस मौके पर दो सोने के सिक्के और एक चांदी का सिक्का जारी किया। यानी कि लंका में चाइना के नाम का सिक्का भी चलता है।

वैसे है तू ही बड़ा अनइथिकल क्वेश्चन। लेकिन आपको क्या लगता है कि क्या भारत को आजादी के समय श्रीलंका को भी भारत में शामिल कर लेना चाहिए था। हां या फिर नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।

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