भारत के कश्मीर मॉडल को अपनाया अब तालिबानियों ने

पिछले कुछ दिनों से रिपोर्ट आ रही थी कि तालिबानी लड़ाकू अफगानिस्तान की बड़ी प्रोविंस कंधार तक पहुंच गए हैं जिसके चलते भारत समेत दुनिया के कई देशों ने वहां पर कोनसेलेट्स बंद करके अपने स्टाफ को वापस बुला दिया था। कांदार को मीडिया में इसलिए इतना ज्यादा डिस्कस किया जा रहा है क्योंकि जिस तरह भारत में बड़ी-बड़ी मेट्रो सिटीज है।

कांधार भी अफगानिस्तान का एक बड़ा शहर है जहां पर छ लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। डोमेस्टिक के साथ-साथ यहां पर एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी है कि विदेशों की कॉन्सोलेट्स के साथ-साथ यहां पर कई ऑफिस इसे रीजनल हैडक्वाटर्स है। हालांकि कामदार को पूरी तरह कैप्सूल करने में तालिबानी कब तक सफलता नहीं मिल पाई है, लेकिन कामदार की तरह एक और अफगानिस्तान का बड़ा शहर है जहां पर इस समय तालिबानी घुस गए हैं और उनको कैप्चर करने की पूरी तैयारी कर ली है। कामदार के बाद तालिबान के निशाने पर है।

अगला बड़ा शहर गजनी जान की आबादी ढाई तीन लाख है। यह कामदार जितना बड़ा शहर लेकिन इसकी गिनती अफगानिस्तान के आठ दस बड़े शहरों में की जाती है। यहां पर एक डोमेस्टिक एयरपोर्ट भी है। साथ में गजनी की सबसे इंपोर्टेंट बात भी है कि यह शहर अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से लेकर का कामदार नेशनल हाईवे है।

उस पर स्थित है। इसीलिए अगर यह तालिबानियों के कंट्रोल में आ गया तो समझो फिर कांदार और बाकी के साउदर्न पार्ट पर भी तालिबानी लड़ाकों का कब्जा हो जाएगा। यानी आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह तालिबानी है। अब बच्चे कुछ और 10 बड़े बड़े शहरों पर चढ़ाई कर चुके हैं। जिस कश्मीर मॉडल के बारे में अपने थमनेल में पड़ा वह तालिबानी इसी गजनी शहर में अपना रहे हैं जो स्टैटिसटिक्स में आतंकी अपना रहे थे।

तालिबानियों ने अब सेम हुई चीज गजनी में करना शुरू कर दिया है और अगर उनका यह प्रयास सफल रहा तो जो विदेशी एजेंसीज अनुमान लगा रही थी कि बड़े-बड़े शहरों समेत पूरी अफगानिस्तान पर कब्जा करते करते तालीबानियो 6 महीने से 1 साल लग सकता है तो फिर तालिबानी कुछ ही महीनों के अंदर अंदर पूरे अफगानिस्तान कोई टेकओवर कर लेंगे।

कश्मीर मॉडल या फिर कश्मीर ईस्टेटेजी की बात करें तो यह चीज तो आपको ही पता होगा कि किस तरह कश्मीर में आतंकी सेना पर हमला करने के बाद जबरदस्ती आम लोगों के घरों में जाकर छुप जाते हैं। वहां पर आम लोगों की आड़ में सेना पर हमले करते हैं जिसके बाद से ना कुछ घर या फिर बिल्डिंग को चारों तरफ से घेर कर उनका एनकाउंटर करना पड़ता है।

कई बार तो शिवलिंग को छुड़वाने के बाद सेना बिल्डिंग को उड़ा देती है। यह स्टेटजी बड़े-बड़े शहरों या फिर भीड़भाड़ की इलाखों के लिए बेस्ट मानी जाती है क्योंकि सिविलियंस का जानी व माली नुकसान होने का खतरा ज्यादा होता है जिसके चलते सेना शहरों में ऑपरेशन इतने अग्रेसिव तरीके से नहीं चला पाती है।

तालिबानी लड़ाकों ने सेम इसी कश्मीर मॉडल को अपना लिया है और हम जिस गजनी शहर की बात कर रहे हैं तालिबानियों ने यह स्टेटजी इस्तमाल करना शुरू कर दिया है। दरसल गजनी से रिपोर्ट से निकल कर आ रही है कि तालिबानी लड़ाकु अब लोगों के घरों में जबरदस्ती घुस कर उन को ढाल बनाकर रब्बान से क्यों डिपॉजिट पर हमला कर रहे हैं, जिसके चलते सिक्योरिटी फोर्स को उन पर कार्रवाई करने में भौतिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक तालिबानियों की इसी सेटेजी की वजह से गजनी मेंसेक्युर्टी फोर्सेज चले गई है और तालिबानियों को बढ़त मिल गई। आम लोगों को शील्ड बनाने वाला मॉडल जिसको हम कश्मीर मॉडल भी कह रहे हैं कि अगर गजनी में सफल हो जाता है तो फिर से वही चीज पूरे अफगानिस्तान के बड़े-बड़े शहरों में देखी जाएगी। भारतीय सेना तो खैर इस तरह की सिचुएशन से काफी सालों से निपट रही है।

लेकिन अफगानिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स इसको इसमें थोड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह सब चीजें देखते हुए आपको क्या लगता है कि क्या कल को तालिबान 100 % अपना कब्जा कर लेगा। हां या फिर नहीं नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर दें।

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