भारत का ISRO पाकिस्तान के SUPARCO के मुकाबले कितना आगे है ? ISRO vs SUPARCO

पाकिस्तान लॉस्ट इन स्पेस रेस यानी कि पाकिस्तान अंतरिक्ष की दौड़ में क्यों हो रहा है। क्यों पाकिस्तान गवर्नमेंट इस बार को को सपोर्ट नहीं करती। साथ में ही बात करेंगे कि अभी तक स्पार्कों ने कितने मिशन लॉन्च किए हैं। पिछले सालों में स्पा को की क्या-क्या अचीवमेंट रही दुनिया में इस बार को का रंग कौन सा है। इसकी ट्यूशन के मिशन कौन-कौन से हैं और क्या लड़कों को सबसे कम पर किया जा सकता है तो दोस्तों चली देखते हैं।

 

दोस्तों इस बार को फॉरवर्ड किया गया था। आज से लगभग 60 साल पहले 1961 में यानी इसरो से 9 साल पहले इसके फाउंडर थे। अब्दुल सलाम अब्बू सलाम एक पाकिस्तानी  छोटी कल फिजिक्स है। इनको 9979 में इलेक्ट्रॉनिक यूनिफिकेशन छोरी के लिए नोबेल प्राइज मिला। यह पहले पाकिस्तानी और पहले मुस्लिम थे जिनको फिजिक्स में नोबेल प्राइज मिला था।

इसके साथ पाकिस्तान दुनिया में 2nd मुस्लिम कंट्री बना, जिसके पास नोबेल प्राइज था। दोस्तों इसके बाद पालकों ने अपना पहला रॉकेट लॉन्च किया। 1962 में जिसका नाम धारा भवन रायपुर बैक टू स्टेज सॉलि़ड फ्यूल रॉकेट था, जो बनाया गया था। नासा के द्वारा गिरोह के 230 किलोमीटर के एटीट्यूड पड़ गया।

इस अचीवमेंट के कारण पाकिस्तान एशिया का तीसरा देश बना, जिसने अपना पहला रॉकेट लॉन्च किया था और ऐसा करने वाला वर्ल्ड में दसवां डिश बना तो चलिए दोस्तों बात कर लेते हैं। वीडियो के मेन टॉपिक पर या नहीं बाय पाकिस्तान लॉस्ट इन स्पेस रेस दोस्तों यह बात डिपेंड करती है।

केवल दो प्रेक्टिस पर अगर दुनिया की किसी भी स्पेस  एजेंसी में इन दोनों फैक्टर्स का लेवल अच्छा है तो वह स्पेस एजेंसी बहुत ही तेजी से ग्रो करती हैं। पर अगर इन दोनों फैक्टर्स का लेवल उस स्पेस एजेंसी में बहुत ही बुरा है तो वह स्पेस एजेंसी किसी भी हालत में ग्रो नहीं कर पाती। इसमें पहला फैक्टर आता है।

नॉलेज यानी उस स्पेस एजेंसी को रॉकेट साइंस की डिग्री नॉलेज होनी चाहिए कि एक रॉकेट को कैसे गाइड करते हैं। कैसे कंट्रोल करते हैं। साथ में ही रॉकेट साइंस के साथ जितने भी फील्ड इंक्लूड है और सारे फेल की डीपी नॉलेज होनी चाहिए जैसे इलेक्ट्रॉनिक और कंप्यूटर साइंस और यहां पर दूसरा फैक्टर आता है।

बजट यानी मनी 231 एजेंसी को ग्लो करने के लिए दूसरी सबसे जरूरी चीज होती है। पैसा जिसकी जरूरत होती है स्पेस टेक्नोलॉजी के बहुत ही एक्सपेंसिव पार्ट बनाने के लिए और एग्जाम पर नासा का टोटल बजट 3 बिलियन यूएस डॉलर है। हमारी इसरो का टोटल बजट  1.9 बिलियन यूएस डॉलर है बात करें।

स्पार्को की तो यहां पर पार्कों का टोटल बजट 30 मिलियन यूएस डॉलर है। इंटरनेट पर मौजूद इस सारे डेटा से हमें पता चलता है कि पाकिस्तान स्पेस एजेंसी स्पा को इन दोनों फैक्टर्स में बहुत ही लो लेवल पर हैं। जहां पर हमारी इसरो का नाम दुनिया की टॉप 5 स्पेस एजेंसी में आता है और दूसरी तरफ से पार को का नाम दुनिया की टॉप-10 स्पेस एजेंसी में भी नहीं आता है।

पार्कों की फैक्ट्री वन ज्ञानी रॉकेट साइंस का लेवल बहुत ही कमजोर होने के कारण इसके पास अभी तक अपने खुद के छोटे-मोटे रोकेट भी नहीं है जिसे अपनी छोटी मोटी सेटेलाइट को लांच कर सकें। अगर तू तो आपको पता नहीं हो तो मैं आपको बता दूं कि इंडिया में ऐसी प्राइवेट स्पेस कंपनी भी है जो इन्हीं छोटी-मोटी सेटेलाइट को लांच करने के लिए अब रेडी है।

इनमें से एक का नाम है अग्निकुल  अग्निकुल बहुत सारे रॉकेट साइंटिस्ट इंजीनियर और प्रोग्राम उसका एक ग्रुप है जो किसी भी देश की सेटेलाइट सॉफ्टवेयर अपलोड को स्पेस में लांच कर सकता है। अपने अग्निबाण रॉकेट से अग्निबाण रॉकेट की हाइट 8 मीटर है। डायमीटर 1.3 मीटर है।

यह रॉकेट 14000 केजी वेट को 700 किलोमीटर ऊपर लो अर्थ आर्बिट तकलीफ कर सकता है। ज्यादा जानकारी के लिए अग्निकुल डॉट इन वेबसाइट पर जा सकते हो। आपको पता चल ही गया होगा कि पाकिस्तान को कम करना बहुत ही दूर की बात है क्योंकि इंडिया की प्राइवेट स्पेस एजेंसी अग्नि को ही स्पा को के आगे बहुत बड़ी है और अगर दोस्तों आपको सच में पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी की हालत देखनी है

तो एक बार आप गूगल पर सर्च जरूर करना कंपैरिजन ऑफ एशियन नेशनल स्पेस प्रोग्राम यहां पर आपको विकिपीडिया मिलेगा  जिसमें आप एशिया की सभी स्पेस एजेंसी की स्टेट चेक कर सकते हो तो पहले हम देख लेते हैं। इसरो को तो यहां पर हमारे पास ऐसा नोट भी है। ऑपरेटर सेटेलाइट्स भी है।

साउंडिंग रॉकेट भी है और इक्वेबल बायोलॉजिकल साउंडिंग रॉकेट भी है क्योंकि इसरो दुनिया की टॉप 5 स्पेस एजेंसी में आती है और जैसे ही आप चेक करोगे पाकिस्तान की स्पार्क को को तो यहां पर इनके पास एस्ट्रोनॉट भी नहीं है। ऑपरेटिव सेटेलाइट्स भी नहीं है। साउंडिंग रॉकेट भी नहीं है। रिकवरेबल बायोलॉजिकल साउंडिंग रॉकेट भी नहीं है। अभी तक पाकिस्तान ने अपनी जितनी भी सेटेलाइट लांच की है या नहीं। अभी तक उन्होंने पांच से छह सेटेलाइट को लांच किया है जिनके नाम है बॉर्डर में जो फर्स्ट डिजिटल कम्युनिकेशन सैटलाइट है पाकिस्तान की पार्क सेट वन पार्क साइड, 1 रिप्लेसमेंट बॉर्डर बी वेदर सैटलाइट से और रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट।

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