भगवान शिव क्यों बने अपने भक्त के घर नौकर ? अनजान भक्त ने ऐसा किया व्यवहार

 

नमस्कार दोस्तों आज की हमारी इस रिपोर्ट में हम आपके लिए एक पक्के शिव भक्त कवि विद्यापति की कहानी लेकर आए हैं। दोस्तों मैथिली भाषा के महाकवि विद्यापति भगवन शिव के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने भगवान शिव पर अनेक गीतों की रचना की है और भगवान शिव विद्यापति की इन रचनाओं से प्रसन्न होकर स्वयं एक दिन अपना वेश बदलकर विद्यापति के पास चले आए और अपना नाम उगना बताया और उनसे कहने लगे। मेरा कोई नहीं है। मुझे अपने साथ रख लो। मैं आपकी सेवा कर दिया करूंगा।

 

 

विद्यापति खुद बहुत गरीब थे, उगना को कैसे रखते पर उगना ने जिद पकड़ ली और सिर्फ दो वक्त की रोटी पर।काम करने को तैयार हो गया तब विद्यापति की पत्नी उन्हें रखने को तैयार हो गए। एक दिन विद्यापति राजा के दरबार में जा रहे थे। तब तपती गर्मी और धूप से विद्यापति का गला सूखने लगा। मगर आसपास दूर-दूर तक कहीं जल नहीं था। तब विद्यापति ने उगना से कहा कहीं से मेरे लिए थोड़ा पानी ले आओ नहीं तो मैं प्यास से मर जाऊंगा। उगना बने भगवान शिव को तो पता ही था कि यहां दूर-दूर तक कहीं पानी नहीं मिलेगा।

वह विद्यापति की नजरों से कुछ दूर गए और वहां अपनी जटा खोलकर एक लोटा गंगाजल भरकर विद्यापति के लिए ले आए। वो शीतल जल पीते ही विद्यापति को गंगाजल का स्वाद आ गया।और वह बोले इस स्थान पर तुम यहाँ जल कहां से लाए तब उगना कहानियां बनाने लगा, परंतु विद्यापति को उगना पर संदेह हो गया कि यह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं बल्कि स्वयं भगवान शिव हैं।

 

 

तब विद्यापति ने उगना को हे भोलेनाथ कहकर पुकारा और उनके पैर पकड़ लिए। हारकर उगना को अपने वास्तविक स्वरूप में आना पड़ा। विद्यापति उनके पैरों में बैठे रोने लगे। बोले, हे प्रभु आप से सेवा करवा कर मेरा तो जीवन ही नष्ट हो गया। शिवजी बोले, लेकिन मुझे इसमें बहुत सुख मिला। मैं तुम्हारे साथ उगना बनकर ही रहना चाहता हूं, लेकिन मेरे वास्तविक स्वरूप का किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए।विद्यापति को तो बिना मांगे संसार का सबसे अनमोल वरदान मिल चुका था  वह राजी हो गए और उगना और विद्यापति पहले की तरह रहने लगे।

एक दिन विद्यापति की पत्नी सुशीला ने उगना को किसी गलती पर चूल्हे से लकड़ी निकालकर मारना शुरू कर दिया। उसी समय विद्यापति वहां आ गए और अचानक उनके मुंह से निकला। अरे मूर्ख यह तुम क्या कर रही हो। यह तो साक्षात भगवान शिव है। इन्हें मार रही हो, नर्क जाओगी। विद्यापति के मुंह से जैसे ही यह बात निकली। भगवान शिव अंतर्ध्यान हो गए।

 

 

इसके बाद उगना बने भगवान शिव को विद्यापति यहां वहां जंगलों में उगना उगना कहते ढूंढने लगे।विद्यापति की ऐसी दशा देखकर महादेव प्रकट होकर बोले, विद्यापति मेरा भेद अब प्रकट हो गया है। अब मैं तुम्हारे साथ नहीं रह सकता। उगना स्वरूप के प्रतीक के रूप में मैं तुम्हारे पास शिवलिंग के रूप में विराजमान रहूंगा। तभी अचानक वहां एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हो गया जो इस समय बिहार के मधुबनी जिले के भवानीपुर गांव में उगना महादेव के नाम से प्रसिद्ध है

तो दोस्तों कैसी लगी  आपको आज की हमारी पक्के शिव भक्त, कवि विद्यापति और उनकी प्रभु उगना की कहानी हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजिएगा |

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