फोरेक्स रिज़र्व में रूस को भी छोड़ा भारत ने इतना पीछे russia के द्वारा बराबरी करना मुश्किल

 इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। भारत के खजाने से जीवन दोस्तों जुलाई के आखिरी आ गए हैं और भारत ने फिर से बना दिया है। रिकॉर्ड दोस्तों अब तो रिकॉर्ड बोलते हैं तो ऐसे लगता है कि आम बात हो गई है। भारत में यह रिकॉर्ड बना दिया। हर हफ्ते भारत रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड तोड़ते जा रहा है। कभी एक्सपोर्ट में रिकॉर्ड तोड़ देता है। कभी भी फॉरेन एक्सचेंज नियर मे रिकॉर्ड तोड़ देता है। समझ नहीं आ रहा है कि आप पर कोविड-19 चल रहा है या फिर भारत का गोल्डन ईयर चल रहा है। दोस्तों आंकड़ों पर नजर डाली है।

 इस हफ्ते के हालांकि आपकी जानकारी के लिए बताएं कि पिछले हफ्ते हमने आपको फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व्स के आंकड़े नहीं दिए थे। क्यों नहीं दिए थे जो कि पिछले हफ्ते हमारा तो फॉरेक्स रेट्स  था 4 मिलियन डॉलर की गिरावट के साथ 603 बिलीयन डॉलर पर पहुंच गया था।

 उस समय हमारा जो खजाना था, तकरीबन 608 बिलियन डॉलर का था। लेकिन इस सब के जो आंकड़े आए हैं, हैरान कर दिया है। 5 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी देखने को मिली है और लाइफटाइम हाई 609 billion-dollar पर हमारा आगरा पहुंच गया है। हालांकि इस बढ़ोतरी में पूर्ण करेंसी एसिड का हिस्सा बहुत ज्यादा है।

 4.7 बिलीयन डॉलर हमारा फॉरेन करेंसी s8ul आर्यन बड़ा है और इसी कारण से हमारा रिजर्वर आज से सुनो बिलेंडर लोटो पहुंच गया है। लेकिन जो एक मजबूत बात है वह गोल्ड रिजर्व रिजर्व में मरा 365 मिलियन डॉलर बढ़ाएं। दोस्तों आपको एक आंकड़ों पर लेकर चलते हैं। यह चाइना जापान सऊदी अरेबिया यहां पर भारत का नंबर 4  609 बिलियन डॉलर के साथ राष्ट्रीय का रीजन भले ही गिरा है लेकिन यहां पर क्या डॉलर को कम करता जा रहा है।

 यही कारण है कि उसका रिजल्ट गिरता जा रहा है और भारत अब चौथे स्थान पर ही रहने वाला है। यहां पर ठप्पा लग चुका है। अवश्य करें। जय भारत से अब कभी भी बढ़ नहीं सकता है। 200 उसके अलावा यह जानकारी अब देखिए कि भारत के रिज़र्व इतना है लेकिन भारत आखिरकार यहां पर अमेरिका और जर्मनी को पहचानने में कामयाब तैसी हो गया है।

 इसलिए हुआ है क्योंकि इन देशों के पास गोल्ड का रिजल्ट है। आप कहेंगे कि भारत बोर्ड का रिजल्ट क्यों नहीं रखता है। भारत को गोल्ड की रिजर्व रखने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम अभी अंडर डेवलपमेंट कंट्रीज है और हमें पैसा दो लॉयन और इसी के साथ युवान की रकम में चाहिए। यह जर्मनी यूके अमेरिका जैसे देश है ना यह डायलॉग है। इनके पास पैसों की कोई कमी नहीं है। यही कारण है कि वह गोल्ड रिजर्व खरीदते हैं ताकि लंबे समय तक उपाशी को सिक्योर करवा कर रख सकें, लेकिन भारत की समस्या यह है कि अगर हम गोल्ड रिजर्व में का अपना खजाना।  

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