तालिबानियों का भारत के खिलाफ नया पैंतरा क्या पीएम मोदी ने ठीक किया देखिये

भारत ने अफगानिस्तान को लेकर अपनी पॉलिसी में कुछ हफ्तों पहले ऐतिहासिक शिफ्ट लेते हुए बहुत ही बड़ा पैसा लिया था जिसके बारे में शायद आप में से कई लोग जानते ही होंगे। वह था तालिबानियों के साथ डिप्लोमेटिक चैनल शुरू कर के फ्यूचर के बारे में उनके साथ डिस्कशन शुरू करना।

वैसे न्यूज़ टुडे हिंदी की कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं है बल्कि 2 हफ्ते पहले इसको कई भारतीय पाकिस्तानी और कई सारी इंटरनेशनल मीडिया उसने भी कवर किया था। ऑफिस के तौर पर आप स्क्रीन पर हिंदुस्तान टाइम्स के 9 जून का एक आर्टिकल का स्क्रीनशॉट सब देख सकते हैं, जिसका टाइटल था इन इंडिया ओपन चैनल में अफगान तालिबान फैशन एंड लीडर्स।

वह कुछ दिनों पहले यह भी खबर सुनने को मिली थी कि भर्ती ऑफिसर्स ने कतर में जाकर तालिबानी लीडर्स के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की है और तब इस खबर को भी वाली खबर किया गया था और एक्ट्रेस के तौर पर स्क्रीन पर आप जून 22 का सुनो जी मैगजीन का टिकट भी देख सकते हैं | वैसे भरतपुर तालिबानी लेडीस के बीच में मीटिंग की खबर का खुलासा किया था।

कतर के स्पेशल एंड वाइफ और काउंटर टेररिज्म एंड मेडिएशन ऑफ कनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन मस्जिद अल कहतानी ने जो तालिबान पीस, एग्रीमेंट और तालिबान को भौतिक लो चली मॉनिटर कर रहे हैं, इसलिए यह खबर आते ही आग की तरह फैल गई थी क्योंकि भर्ती सरकार शुरू से ही अफगानिस्तान में डेमोक्रेटिक घमंड का पक्ष लेती रही थी और तालिबान गुट जिसको पाकिस्तान का समर्थन हासिल था

जो पाकिस्तान में इस्लामिक रूल आने की बात करते हैं। भारत उनके खिलाफ था। साथ में इस तरह की मीडिया रिपोर्ट आने के बाद भारतीय सरकार ने तालिबान के साथ कतर में इस तरह की किसी भी मीटिंग की पुष्टि नहीं की थी। उन्हीं को पूरी तरह नकार दिया था। मगर अब द संडे गार्जियन मीडिया उसके वाले से एक मीडिया रिपोर्ट सामने निकल कर आ रही है कि तालिबान के पॉलिटिकल बैंक एक बड़े लीडर ने भारत के साथ कोई भी मीटिंग से बिल्कुल मना कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक कतर की राजधानी दोहा में स्थित तालिबान के ऑफिस के स्पोक पर्सन टू हेल शाही ने द संडे गार्जियन को एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने भारत और अफगानिस्तान को लेकर कई खुलासे किए। इस इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अफगानिस्तान पीस प्रोसेस के दौरान क्या तालिबान की कोई टीम कतर की राजधानी दोहा में भारतीय अधिकारियों के साथ मिली तो उसके जवाब में उन्होंने कहा कि मुझे तो यह खबर कुछ हो सर मीडिया से मिली। मेरे पास ऐसी किसी भी मीटिंग की कोई भी जानकारी नहीं है।

 जब इसकी काउंटर क्वेश्चन मैं यह पूछा गया कि इस मीटिंग का खुलासा मस्जिद अल कहतानी ने कुछ किया जो कतर की एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री के स्पेशल एंड वाइफ और काउंटर टेररिज्म एंड कनफ्लिक्ट रेजोल्यूशन है। उसका जवाब में तालिबान इस पप्पू ने साफ कह दिया कि आप फिर उनसे जाकर पूछ लीजिए। मेरे पास तो इस मीटिंग की कोई भी जानकारी नहीं है।

 वैसे देखा जाए तो मस्जिद अल कहतानी और तालिबान के स्पोक्सपर्सन दोनों बहुत ही इंपॉर्टेंट और हाई पोजीशन पर बैठे हैं। ऐसे में एक मीटिंग की पुष्टि करना  और दूसरे का सिरे से खारिज करना बिल्कुल हैरान कर देने वाला है। साथ में उन्होंने एक इंटरव्यू में अफगानिस्तान से लेकर पाकिस्तान और कई मुद्दों पर कई बातें बोली, लेकिन भारत को लेकर उन्होंने बयान दिया है।

 उसने फिर से कट कट के कान खड़े कर दिए हैं। अब क्या चाहिए। लगाए जा रहे हैं कि शायद भारत के अधिकारियों और तालिबानी लेडीस की मीटिंग के बीच अभी कुछ कंट्रीज निकल कर नहीं आया है। तभी तालिबानी से धीरे कर रहा है और भारत बिल्कुल चुप बैठे हैं। वैसे भी तालिबान पूरी तरह पाकिस्तान की गोद में जाकर बैठा है। मगर क्या भारतीय सरकार को अफगानिस्तान कॉमन को पूरी तरह इग्नोर करके तालिबान के साथ बाद शुरु कर देनी चाहिए थी। हां या फिर नई नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।  

 

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