चीन, अमेरिका और जापान भी जो नहीं कर पाए थे उसे कैसे करेगा भारत, PM नरेंद्र मोदी का साहसिक लक्ष्य ।

भारत ने एक ऐसे मुश्किल लक्ष्य को हासिल करने का फैसला किया है। जिस लक्ष्य को हासिल करना, अमेरिका जापान और चीन के लिए भी उनके समय में काफी मुश्किल हो गया था जैसा कि पीएम मोदी ने 2025 तक देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी बनाने का लक्ष्य रखा है।

 

 

हालांकि जब पीएम मोदी ने 2025 तक देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी बनाने का लक्ष्य रखा तब हमारी ही देश में काफी लोगों ने किया। मोदी के ऐसे बयानों का मजाक उड़ाया, लेकिन दुनियाभर के जानकारों ने पीएम मोदी की ऐसे लक्ष्य को बहुत ही मुश्किल भरा।

लक्ष्य तो बताया लेकिन पीएम मोदी के साहस भरे फैसले की प्रशंसा भी की क्योंकि लक्ष्य बड़ा होगा तो कोशिश भी बड़ी होगी और जब कोशिश बड़ी होगी तो लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए तो लक्ष्य की आस पास तो पहुंच ही जाएंगे। लेकिन अगर उन देशों की आंकड़ों को देखा जाए जिन्होंने लगभग 3 ट्रिलियन  5 ट्रिलियन डॉलर का सफर तय किया तो यकीनन आपको भी  समझ में आ ही जाएगा कि ऐसा लक्ष्य हासिल करना, अमेरिका जापान और चीन के लिए भी आसान नहीं था।

 

 

दरअसल गुलमर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब अमेरिका भारत के पोजीशन पर खड़ा था यानी कि अमेरिका की जीडीपी लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर के आसपास थी। तब अमेरिका को भी तीन से पांच $10 का सफर तय करने में 11 साल का समय लगा था। वहीं जापान को भी लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर का सफर तय करने में पूरे 9 सालों का समय लगा था। जबकि चीन को 3 से 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी बनने में 6 सालों का समय लगा था।

हालांकि चीन ने अमेरिका और जापान के मुकाबले तेजी से सफर को तय किया, लेकिन चीन ने पिछले 25 सालों में अपने देश के विनिर्माण केंद्रों को मजबूत बनाने पर काफी ध्यान दिया था। ऐसे में देखा जाए तो अमेरिका जापान और चीन के मुकाबले भारत ने केवल 2025 तक देश को पांच ऑस्ट्रेलियन डॉलर की जीडीपी बनाने का जो लक्ष्य रखा है, लक्ष्य अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती है।

 

 

हालांकि जर्मनी 2009 में 3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी बन गया था और तब से लेकर आज तक लगभग 12 सालों का समय गुजर गया है। लेकिन जर्मनी अभी भी 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी नहीं बन पाया। ऐसे में देखा जाए तो इतने कम समय में यानी कि 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी बनाना काफी मुश्किल लक्ष्य तो है ही, लेकिन काफी साहस भरा फैसला भी है।

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