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ऑस्ट्रेलिया में क्यों उठ रही है योगी आदित्य नाथ की मांग ? ऑस्ट्रेलिया के मंत्री ने कहा लोन पर ही देदो |

कोरोना वायरस जब से आया है तब से पूरी दुनिया में यह देखने को मिल रहा है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में नागरिक अपनी अपनी सरकारों के खिलाफ बहुत ही ज्यादा गुस्से में है। कई देशों में तो लोग अपनी सरकारों की परफॉर्म से नाराज होकर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

 

 

वहीं कई देश ऐसे भी हैं जहां पर सरकारें जो कि कोरोना से निपटने के लिए स्ट्रिक्ट मेजर्स अपना रही है। लॉकडाउन लगा रही है  इकोनोमिकल एक्टिविटीज बंद कर रही है। उनके खिलाफ लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।हैरानी तो यह यह देखकर होती है कि दुनिया के कई कोनों में कई लोग ऐसे भी हैं जो कोविड-19 की वेक्सीन के खिलाफ भी प्रोटेस्ट कर रहे हैं और उनका यह कहना है कि हमें कोई वेक्सीन नहीं लगानी है।

यानी मोटे तौर पर को तो मैक्सिमम कंट्रीज में देखा जा रहा है कि नागरिक सारा गुस्सा सरकारों पर ही निकाल रहे हैं। सारा ठीकरा सरकारों पर ही छोड़ रहे हैं। अब मैं यह नहीं कह रहा कि दुनियाभर की सभी सरकारों ने कोरोना खिलाफ बहुत ही अच्छा काम किया है। हमने उसका एग्जांपल देख लिया जब पिछले अमेरिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिन्होंने कोविड-19 को सीरियसली नहीं लिया था।

उनको अपनी कुर्सी तक गवानी पड़ गई। सेम यही हाल आज की डेट में आस्ट्रेलिया का भी है। आई मीन वहा भी सोसाइटी का एक बड़ा हिस्स्सा ऐसा है जो अपनी सरकार से बहुत नाराज चल रहा है।

 

 

वैसे आस्ट्रेलिया में कोविड-19 की सिचुएशन को अगर देखा जाए तो अभी तक वहां पर कोविड-19 के बस 31000 केस के सामने आये है है, जबकि कोविड-19 से मौतें 910 हुई हैं, लेकिन अगर आस्ट्रेलिया की आबादी देखी जाए तो वह मात्र ढाई करोड़ के आसपास है।

यह तो चलो कोविड-19 की केसेस की बात थी। वहीं अगर वैक्सीनेशन की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक वहां पर अभी तक ढाई करोड लोगों को 93 लाख वेक्सीन लग गई है, जिनको ऑस्ट्रेलिया में दोनों डोज़ लग गए हैं वह आस्ट्रेलिया की आबादी के करीब साढ़े 9% के करीब है।

भारत से इसका कंपैरिजन किया जाए तो ऐसे लोग जिनको दोनों डोज़ लग गए हैं। भारत में उनकी संख्या आबादी के 5% के आसपास है। लेकिन इसमें यह चीज भी देखी होगी कि भारत की आबादी लगभग 135 करोड के आसपास है जबकि आस्ट्रेलिया की आबादी ढाई करोड बस

इसीलिए अगर आस्ट्रेलिया का कंपैरिजन अमेरिका यूके और बाकी के वेस्टर्न और यूरोपियन देशों के साथ करें जो डेवलप्ड है और जहां की आबादी ऑस्ट्रेलिया की तरह कम है तो ऑस्ट्रेलिया का यह डाटा बहुत ही ज्यादा कम है जिसको लेकर आस्ट्रेलिया में पीएम स्कॉट मॉरीसन के खिलाफ लोगों का गुस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा हैं।

 

 

लेकिन अब यह सोचिए कि ऑस्ट्रेलिया में योगी आदित्यनाथ की एंट्री कैसे हुई तो आपको बता दूं कि हुआ यह कि एक ट्विटर यूजर ने भारत के 2 राज्य महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को कंपेयर करके बताया कि कैसे महाराष्ट्र के मुकाबले यूपी ने कोविड-19 को  किस तरह ivermectin नाम का ड्रग इस्तेमाल करके पूरी तरह कंटेन करके रखा है। पिछले 1 महीने में पूरे भारत में जितने भी कोविड 19 के कारण डेथ हुई हैं, उनमें से मात्र 1% लोग यूपी के थे, जबकि 50 % लोग महाराष्ट्र के थे।

ट्विटर का नाम है जे चमी | यह ट्वीट थोड़ा वायरल हो गया था, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के एक मेंबर ऑफ पार्लियामेंट यानी वहां के MP क्रेक केली ने जे चमी का यह ट्विट रीट्विट करते हुए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ कर दी और उन्होंने लिखा कि क्या हमें सीएम योगी आदित्यनाथ कुछ समय के लिए लोन पर मिल सकते हैं ताकि जो हमारी होपलेस इम्कोंफिडेंट यानी इमकेम्पेन्ट स्टेट प्रीमियर है।

उन्होंने जो यहां पर मेस क्रिएट किया है। योगी आदित्यनाथ ऑस्ट्रेलिया में आकर यहां पर भी ivermectin रिलीज करके उसको ठीक कर दे। ivermectin ड्रग की बात करें तो यह एंटीपैरासाइटिक बैग है जो कुछ इंफेक्शन के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। वही मेंबर ऑफ पार्लियामेंट क्विकली जिन्होंने योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है।

 

 

वह कुछ महीनों तक ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी के मेंबर थे जिसकी इस समय स्ट्रेलिया में सरकार भी है, लेकिन उन्होंने इसी साल फरवरी के महीने में अपनी सरकार की कोविड 19 मैनेजमेंट से नाराज होकर लिबरल पार्टी से क्वाइट कर दिया।

अब वे इंडिपेंडेंट है। क्रेक केलि की बात करें तो वह शुरू से ही कोविड 19 के खिलाफ वैक्सीनेशन के इस्तेमाल के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे और उन्होंने सपोर्ट किया था। वेक्सीन की जगह इसी ivermectin को इस्तेमाल जिसका इस्तेमाल योगी आदित्यनाथ की सरकार बड़े पैमाने पर कर रही है।

वैसे जो भी हो अगर आबादी के लिहाज से देखा जाए तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने वाकई में यूपी में बहुत ही अच्छा काम किया है। जिसको लेकर उनकी तारीफ होना तो लाजमी है। वैसे आपका क्या इसके बारे में सोचना है। क्या सीएम योगी आदित्यनाथ ने कोविड-19 को लेकर यूपी में अच्छा काम किया है। हां या फिर नहीं नीचे कमेंट करके अपनी राय जरूर बताएं।

 

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