इन भारतीय बच्चों को NASA भी करती है सलाम देखिये इन बच्चो ने क्या कारनामा कर दिखाया

 भारत में इस प्रथमेश जजू दोस्तों ये लड़का हाल ही में इंटरनेट पर वायरल हुआ है जैसे ही आप इसका नाम इंटरनेट पर सर्च करोगे तो यहां पर आपको इसके बारे में बहुत सारी न्यूज़ आर्टिकल मिल जाएंगे। पर क्या आपको पता है कि इसने ऐसा क्या कर दिखाया जिसे रातों-रात इतना फेमस हो गया। दोस्तों यह लड़का पुणे का रहने वाला है और अभी इसकी उम्र महज 16 साल है।

 इसने मई 2021 के दिन रात के 2:00 बजे अपने सिलिस्ट रोल पाइप  स्कोप से चांद के उस हिस्से की हाई क्वालिटी तस्वीरें कैप्चर की जिसे कहा जाता है। मीनल मोहन चांद के इस हिस्से पर बहुत सारे मेटल्स और दूसरे एलिमेंट पाए जाते हैं।

 जैसे सिलिकॉन आयरन मैग्नीशियम, कैल्शियम, एलुमिनियम और टाइटेनियम जब चांद के इस हिस्से को धरती से टेलीस्कोप की मदद से साफ देखा जा सकता था तब प्रथमेश ने इसकी हाई क्वालिटी फोटो लेना स्टार्ट कि जिसकी प्रोसेसिंग में लगभग 40 घंटों का समय लगा और टोटल 50 हजार एचडी फोटो कैप्चर हुई चांद की इन हाई डेफिनेशन तस्वीरों की क्वालिटी इतनी ज्यादा थी कि इनका साइज 100gb से भी ऊपर चला गया और जब भारत में इसने यूट्यूब पर एक वीडियो देखकर इन सारी तस्वीरों को जोड़कर चांद का एक 3D मॉडल तैयार किया तब इसका साइज

सी जी बी के करीब हुआ पर बाद में इसको कंप्रेस करके 600mb तक कर लिया गया और दोस्तों यह बहुत ही ज्यादा मेहनत और नॉलेज का काम है जिसको हर कोई कर नहीं सकता। पर यह पाठ में इसकी एस्ट्रोनॉमी में इंटरेस्ट एक्यूरेट टाइम के कारण ही पॉसिबल हो पाया है जिसने दुनिया में इनको एक नई पहचान दिलाई।

 भारत में जो झुके इंस्टाग्राम पर अभी 61800 फ्लावर है जहां पर इन्होंने चांद की फोटो को अपलोड किया है तो दोस्तों प्रथमेश के इस काम के लिए हमारा दिल से सलाम है जिसके कारण हम चांद की बहुत सारी ढेर और बहुत ही अनबिलेबल तस्वीरें देख पाए हैं। 

नंबर दो रिफात शाहरुख तमिलनाडु के रहने वाले हैं और अभी इनकी उम्र महज 21 साल है। पर जबकि 18 साल के थे। यानी साल 2017 में इन्होंने दुनिया की सबसे छोटी सेटेलाइट नीतीश का वेट केवल 64 ग्राम था। यानी 64 ग्राम के करीब यह 3D प्रिंटेड सेटेलाइट थी और इसकी कीमत 1200000 रुपए थी।

 सेटेलाइट का नाम डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया था जो उनकी h9me के प्रति इंटरेस्ट को दिखाती है। रिपोर्ट शाहरुख दुनिया में उन हजारों बच्चों में से एक थे, जिसके माइक्रोसैटलाइट के प्रोजेक्ट को नासा ने एक्सेप्ट किया था और 22 जून 2017 के दिन इस सेटेलाइट को नासा ने खुद लांच किया।

 अपने वॉल ऑफ फ्लाइट फैसिलिटी से इसके बाद 2019 में रिपोर्ट ने दूसरी माइक्रोसैटलाइट डिजाइन की जिसका नाम था। कलाम सेट भी दो और इस सेटेलाइट को इसरो ने अपने रोकेट पीएसएलवी से लांच किया जो स्पेस के फील्ड में अपने बेहतरीन योगदान के लिए जाने जाते हैं। 

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