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इज़राइल कैसे बना सबसे ताकतवर देश लगबग 60 सालो में 6 युध लड़े और सबमे इजराइल जीता

दुनियां के सबसे ताकतवर देशों में से एक देश है इजराइल ! विश्व भर में यह यहुदी धर्म को मानने बाला एक मात्र देश इजराइल ! इस देश का इतिहास भारत से काफी मिलता जुलता है भारत की तरह आजादी के लिए इसको भी कई टुकड़ों में होना पड़ा ! भारत दो टुकड़ों में तो इजराइल भी फिलिस्तीन के साथ तीन टुकड़ों में बंटा जिसमे एक हिस्सा यहूदियों को इजराइल के रूप में मिला और बाकी दो हिस्से अरबों को मिले !

आज हम आपको फिलिस्तीन से अलग होकर बने इस नए देश इजराइल के जन्म की कहानी बताते है ! शुरुआत फिलिस्तीन से करते है ! फिलिस्तीन उस्मान सम्राज्य का हिस्सा था 1878 में उस्मान सम्राज्य में 87 फीसदी मुस्लिम , 10 फीसदी इसाई और 3 फीसदी यहूदी लोग थे !

19 वीं सदी में पहली बार इजराइल की स्थापना की मांग उठी जिसे शेयनिज्म आन्दोलन का नाम दिया गया दुसरे विश्व युद्ध के बाद उस्मान सम्राज्य का पतन हो गया और ब्रिटेन फिलिस्तीन पर राज करने लगा ! अंग्रेजों ने बिल फ़ोर्स घोषणा करके यहूदियों के लिए अलग देश की मांग का समर्थन किया इसके पीछे उनकी फूट डालो और शासन करो की निति थी !

इसके बाद अंग्रेजों ने यहूदियों के अप्रवासन की सहमती दे दी ! इससे बड़ी संख्या में यहूदी फिलिस्तीन का रुख करने लगे ! यह लोग फिलिस्तीन में कब्जा कर खेती करने लगे यहूदियों की बढती संख्या और पहले से रह रहे अरब लोगों में इसका कारण हिंसा होने लगी इसके देखते हुए 1930 में अंग्रेजों ने अप्रवासन को सिमित करने का फैसला कर लिया लेकिन इससे मामला और बिगड़ गया अप्रवासन समिति करने के विरोध में यहूदी लड़ाकों का गठन होने लगा वे लोग अरब के लोगों और ब्रिटिश राज को खत्म करने की कोशिश करने लगे !

शुरुआत में फिलिस्तीन की अवादी में यहूदियों की संख्या मात्र 3 फीसदी थी जो 1938 में बढ़कर 30 फीसदी जा पहुंची इसके बाद भी गैर कानूनी तौर पर यहूदी फिलिस्तीन आते रहे जिसे हिंसा में और ज्यादा बढ़ोतरी होने लगी ! वे लोग ब्रिटीश राज से जुड़े संस्थानों में हमला करने लगे ! दुसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद भी जुलाई 1946 तक लगातार 6 साल के युद्ध से ब्रिटेन कमजोर हो चला था

इसके बाद भी यहूदियों के अप्रवासन का सिलसिला जारी रहा ! बढती हिंसा में नाकाम हो रही ब्रिटिश राज ने UN से इस मामले को हल निकालने को कहा इसके बाद नवंबर 1947 में UN ने फिलिस्तीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला लिया ! पहला हिस्सा यहूदियों को दूसरा हिस्सा अरब को और तीसरा यरूशलम को ! 14 मई 1948 में अंग्रेजी राज खत्म हो गया और इजराइल ने खुद को एक आजाद देश घोषित कर दिया !

दुसरे विश्व युद्ध में यहूदियों के नरसंहार के बाद बचे खुचे यहूदियों ने भागकर यरूशलम के आस पास पनाह ले ली थी और अब के मुसलमानों ने इसका विरोध किया ! जिसके बाद यहूदियों और अरबियों का युद्ध शुरू हो गया इसी झगड़े के बीच संयुक्त राष्ट्र ने 19 नवम्बर 1947 को फिलिस्तीन के तीन हिस्से किये थे जिसमे इजराइल लास्तिन के रूप में दो राष्ट्रों को मान्यता मिली !

जबकि यरूशलम को अलग राज्य बनाने की बात की गई हालाँकि बाद में इजराइल ने यरूशलम को भी अपने देश में मिला लिया इसके साथ ही अरब और इजराइल की दुश्मनी शुरू हो गई जिसमे एक तरफ इजराइल अकेला था और दूसरी तरफ ईराक , लेवनान , सीरिया , मिस्र , लिविया , यमन , सऊदी अरब और अन्य मुस्लिम देश थे !

इस लड़ाई में इजराइल को सिर्फ अमेरिका का साथ मिला मुस्लिम देशों ने कई बार अलग अलग तरीके से इजराइल पर हमला किया लेकिन हर बार उन्हें मूंह की खानी पड़ी ! ऐसा ही एक हमला जून 1967 को हुआ जिसको 6 डेज वार कहा गया इस युद्ध में इजराइल ने एक साथ मिस्र , जॉर्डन , सीरिया , ईराक और सऊदी अरब को मात्र 6 दिन में पराजित करके अपनी ताकत दिखाई !

पिछले 67 सालों में इजराइल ने 7 से ज्यादा युद्ध लड़े जिनमे हर बार उसने ही जीत हासिल की ज्यादातर दुसरे देशों ने ही उन पर हमला किया जिसमे उन्हें मूंह की खानी पड़ी ! 6 अक्तूबर 1973 को ऐसे ही हमले में सीरिया और मिस्र ने इजराइल पर अचानक उस समय हमला बोल दिया जब देश के लोग योम नामक त्यौहार बना रहे थे इजराइल ने भी तुरंत हमले का जवाब दे दिया !

जिसके बदले में मिस्र और सीरिया को भारी नुक्सान उठाना पड़ा ! 1972 में म्युनिक में हुए ओलम्पिक में फिलस्तीन के आतंकी संगठन ने स्टेडियम के बीच में इजराइल के 12 खिलाड़ियों पर हमला करके उन्हें मौत के घाट उतार दिया था खेल जगत में इससे सबसे बड़ा हिर्दय विदारक घटना माना था

लेकिन इसके बाद इजराइल ने इसे अपने उपर लेते हुए इसे अपनी सुरक्षा के इल्जामातों को कड़ा किया उस समय इजराइल की प्रधानमन्त्री रही गोल्डा मेयर एक एक करके सभी खिलाड़ियों के घर गई और उनके परिजनों से वादा किया की इस बारदात में जो भी व्यक्ति शामिल है उनमे से किसी को भी नही छोड़ा जाएगा ! इस घटना का बदला लेने का जिम्मा आया इजराइल की ख़ुफ़िया एजंसी मोसाद पर !

मोसाद के सदस्य ने दुनियां के कोने कोने में उन आतंकियों को ढूढ़ कर दर्दनाक तरीके से मौत के घाट उतारा था ! मोसाद का यह ऑपरेशन अंतिम दोषी के मारे जाने यानी लगभग 3 दशक तक चला ऐसी ही एक घटना 27 जून 1976 को हुई जब तेल अबीब से पेरिस जा रहे इजराइल के एक हवाई जहाज का फिलिस्तीनी आतंकी संगठन PFFLF ने अपहरण कर लिया और उसे युगांडा ले गए युगांडा के तानाशाह इदी अमीन ने आतंकियों को अपने देश में उतरने की इजाजत दे दी !

अपहरणकर्ताओं ने बंधक बनाए लोगो को छोड़ने के बदले फिलिस्तीन के आतंकियों की रिहाई की मांग की लेकिन इजराइल की सरकार ने इसके बदले कमांडो कार्यवाही का विकल्प चुना ! जिसके बाद दुनियां के सबसे खतरनाक मिशन को अंजाम दिया गया जिसमे इजराइली कमांडो और मोसाद के सदस्य ने युगांडा जैसे देश में जा कर सभी अपहरणकर्ताओं को मारा और सभी बंधकों को सुरक्षित रिहा करवाया !

मार्च 1978 में लेवनान के आतंकी संगठन PLO के आंतकियों ने 35 इजराइली नागरिकों की हत्या कर दी इसका बदला लेने के लिए इजराइल ने लेवनान पर हमला कर दिया ! जिसके बाद जान बचाने के लिए PLO के आतंकी देश छोड़ कर भाग गए जब की लेवनान की सरकार को भी इजराइल के सामने घुटने टेक गिड़ागड़ाना पड़ा !

जून 1981 में भी इजराइल ने एक ऐसी ही घटना को अंजाम दिया जिसे देख कर पूरी दुनियां हैरत में पड़ गई असल में इजराइल को भनक लग गई थी की तानाशाह सदाम हुसैन परमाणु हथियारों की खेफ तैयार करवा रहा है इजराइल ने इसकी जानकारी सयुंक्त राष्ट्र और अमेरिका को दी ईराक पर दबाब पड़ा तो उसके ऐसी किसी प्लानिंग से साफ़ इनकार कर दिया लेकिन इजराइल को पका विश्वास था की सदाम हुसैन अपने देश में परमाणु कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहे है इजराइल ने इसके खात्मे के लिए खतरनाक मिशन को अंजाम दिया !

जिसके बाद इजराइली सैनिको ने ईराक में घुसकर 8 जून 1981 को उन्होंने 16 परमाणु से यंत्र तवाह कर दिया इजराइल को यहुदिओं का देश कहा जाता है जिसकी 80 फीसदी से भी ज्यादा आबादी यहूदियों की है ! इजराइल को दुनियां भर में यहूदियों के अधिकारों का रक्षक भी कहा जा रहा है इसलिए इजराइल सरकार ने यह व्यवस्था कर रखी है की दुनियां में कहीं भी कोई यहूदी पैदा होता है तो उसे जन्म के साथ ही इजराइल की नागरिकता मिल जाती है !

इजराइल दुनियां का अकेला ऐसा देश है जो पूरी तरह एंटीवेल्स्टीक मिसाइल डिफेन्स सिस्टम से लेंस है इसका मतलब यह है की इजराइल पर कोई देश मिसाइल हमला नही कर सकता है ऐसा करने बाली मिसाइल इजराइल वापस उसी के देश में मोड़ देता है !

इजराइल दुनियां के उन चुनिन्दा देशों में से है जिनका अपना सेटालाईट सिस्टम है और वो किसी से इसे साझा नही करता इजराइल दुनियां का इकलोता ऐसा देश है जहाँ प्रत्येक नागरिक को सेना में शामिल होना जरूरी है लड़कों के लिए इसकी अवधि तीन साल और लड़कियों के लिए दो साल है ! इजराइल दुनियां भर के देशों को हथियारों की सप्लाई करता है सबसे उन्नत किस्म के हथियारों का निर्माण इजराइल में ही होता है ! तो यह थी इजराइल की हिस्ट्री , इतिहास और ताकत !

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